थोड़ा सा मौसम सुहाना हुआ है!थोड़ी हकीकत फसाना हुआ है!!

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रचना :- रवि शंकर अमित!

थोड़ा सा मौसम सुहाना हुआ है!
थोड़ी हकीकत फसाना हुआ है!!

चले थे हम साथ मिलकर मगर अब!
बिछड़ने का सौ सौ बहाना हुआ है!!


कहें किन से दिल में जो पाल थे हसरत!
वो हसरत ही दिल का तराना हुआ है!!


तबस्सुम जो होठों पे होती थी अक्सर!
उसे गायब हुए एक जमाना हुआ है!!


जो आते थे पलके उठाये उठाये!
वो झुकती निगाहें अब ताना हुआ है!!


कहीं दूर वो दिख भी जाए अगर अब!
तो बच बच के नजरों से जाना हुआ है!!


पलट दूँ ज़माने की रस्मों रीवाजें!
अगर उनका फिर मुस्कुराना हुआ है!!


थोड़ा सा मौसम सुहाना हुआ है!
थोड़ी हकीकत फ़साना हुआ है!!

Note :- Its a copyright content by the author Ravi Shankar Amit

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