रिपोर्ट- मिथुन कुमार!
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अपने बेटे निशांत कुमार के साथ नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड स्थित पैतृक गांव कल्याण बिगहा पहुंचे। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और राज्यसभा सांसद बनने के बाद यह उनका गांव का पहला दौरा था। इस दौरान उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी मंजू देवी की 19वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गांव पहुंचने से पहले ही पूरे इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। गांव को तोरण द्वारों और फूलों से सजाया गया था। डीएम कुंदन कुमार और एसपी भारत सोनी ने खुद कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया था। जैसे ही नीतीश कुमार गांव पहुंचे, समर्थकों और कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार ने सबसे पहले गांव के देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद दोनों राम लखन सिंह स्मृति वाटिका पहुंचे, जहां पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी स्वर्गीय मंजू देवी को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार, जिले के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं कई फरियादियों ने भी मौके पर अपनी समस्याएं रखीं, जिन्हें नीतीश कुमार ने सुना।
स्थानीय कार्यकर्ता ककू उर्फ राजकिशोर सिंह ने बताया कि यह पूरी तरह निजी और पारिवारिक यात्रा थी, लेकिन गांववासियों और समर्थकों के प्रेम को देखते हुए विशेष तैयारियां की गई थीं।
स्पेशल पैकेज: नीतीश और मंजू देवी की अनसुनी प्रेम कहानी
नीतीश कुमार और मंजू देवी की कहानी बिहार की राजनीति की सबसे चर्चित और भावुक कहानियों में गिनी जाती है। कहा जाता है कि नीतीश कुमार ने शादी के मंडप में पहली बार मंजू देवी को देखा था।
शादी से पहले उन्होंने दो शर्तें रखी थीं पहली, दहेज नहीं लेंगे और दूसरी, मंजू देवी की सहमति से ही शादी होगी। उस दौर में यह फैसला समाज के लिए एक बड़ी मिसाल माना गया।
राजनीतिक संघर्ष के दिनों में जब नीतीश कुमार लगातार चुनाव हार रहे थे, तब मंजू देवी ने अपनी ढाई साल की जमा पूंजी उन्हें चुनाव लड़ने के लिए दे दी थी। उसी चुनाव में नीतीश कुमार ने पहली बड़ी जीत हासिल की थी।
राजनीति की व्यस्तताओं और जेल यात्राओं के बीच भी मंजू देवी हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं। वर्ष 2007 में मंजू देवी का निधन हो गया था। बताया जाता है कि उनकी मौत पर नीतीश कुमार फूट-फूटकर रो पड़े थे।
आज भी हर साल उनकी पुण्यतिथि पर नीतीश कुमार स्मृति स्थल पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।




