पटना- उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हुआ चैती छठ महापर्व!

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रिपोर्ट- अमित कुमार!

छठ पूजा का अंतिम दिन है, और लोग सुबह के अर्घ्य के साथ इस 36 घंटे के कठिन व्रत का समापन कर रहे हैं। यह दिन जीवन में सकारात्मकता, नई शुरुआत और सूर्य देव की पत्नी ‘उषा’ (भोर की किरण) की आराधना का प्रतीक है. व्रती पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

पटना की सड़कों पर छठव्रतियों का हुजूम उमड़ पड़ा है, जो गंगा घाटों की ओर बढ़ रहे हैं. जिला प्रशासन ने उनकी सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं. घाटों पर साफ-सफाई, बिजली, पानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.

छठ पूजा एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है, जो सूर्य देव और उनकी पत्नी उषा की पूजा के लिए मनाया जाता है. यह त्योहार बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बहुत लोकप्रिय है. छठ पूजा के दौरान, व्रती 36 घंटे का कठिन व्रत रखते हैं, जिसमें वे पानी भी नहीं पीते.

छठ पूजा के दौरान, लोग अपने परिवार और समुदाय के साथ मिलकर पूजा करते हैं. वे सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उनकी कृपा की कामना करते हैं. छठ पूजा का त्योहार जीवन में सकारात्मकता, नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है.

छठ पूजा के अवसर पर विशेष इंतजाम

पटना में गंगा घाटों पर छठव्रतियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. घाटों पर साफ-सफाई, बिजली, पानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. इसके अलावा, पुलिस और प्रशासन की टीमें भी तैनात हैं, जो व्रतियों की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रख रही हैं.

छठ पूजा का अंतिम दिन है, और लोग सुबह के अर्घ्य के साथ इस 36 घंटे के कठिन व्रत का समापन कर रहे हैं. व्रती पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. इसके बाद, वे अपने घरों में वापस जाएंगे और अपने परिवार के साथ मिलकर पूजा करेंगे.

छठ पूजा एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है, जो सूर्य देव और उनकी पत्नी उषा की पूजा के लिए मनाया जाता है. यह त्योहार जीवन में सकारात्मकता, नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है. पटना में गंगा घाटों पर छठव्रतियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. छठ पूजा का समापन सुबह के अर्घ्य के साथ होगा, जिसके बाद व्रती अपने घरों में वापस जाएंगे और अपने परिवार के साथ मिलकर पूजा करेंगे.

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