रिपोर्ट अनमोल कुमार
नयी दिल्ली। “डिजिटल समाज और मानवीय मूल्य: एआई युग में एकात्म मानव दर्शन का पुनरुद्धार” विषय पर डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का उद्घाटन वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया।समापन कार्यक्रम में केन्द्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन मेघवाल शामिल हुय।इस अवसर पर भारत की सभ्यतागत विकास तथा सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक के बीच समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि यह वैश्विक समझौता इस बात का सबूत है कि भारत अब एआई के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने जा रहा है,जो 2047 से बहुत पहले ही ‘विकसित भारत’ के सपने को पूरा करने में मदद करेगा।कहा कि भारत सरकार का मानना है कि एआई केवल छात्रों के लिए नहीं,बल्कि समाज के हर व्यक्ति के लिए है।उन्होंने डिजिटल साक्षरता को जन-जन तक पहुँचाने पर जोर दिया,ताकि आम आदमी भी इस तकनीक का लाभ उठा सके।उन्होंने डीपफेक और एआई से फैलने वाली भ्रामक जानकारियों के प्रति सावधान रहने की चेतावनी भी दी।800 से अधिक शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों की उपस्थिति में भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नैतिक मानकों को तय करने वाले वैश्विक मार्गदर्शक के रूप में अपनी भूमिका स्पष्ट की।इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बिहार का भी प्रतिनिधित्व रहा।बिहार से अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश महामंत्री वैशाली जिला निवासी ज्ञानेन्द्र नाथ सिंह एवं प्रदेश संगठन मंत्री संजय कुमार आजाद के साथ प्रदेश अभिलेखागार प्रमुख वैशाली निवासी निक्की कुमारी शामिल हुई।8स अंतररष्ट्रीय संगोष्ठी में वैशाली जिला के उच्च माध्यमिक विद्यालय दाउदनगर की शिक्षिका प्रदेश अभिलेखागार प्रमुख निक्की कुमारी ने नैतिक डिजिटल व्यवहार पर आकर देने में शिक्षको और शैक्षिक संस्थानों की भूमिका पर शोध पत्र प्रस्तुत किया।केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि एआई का कानूनी और नैतिक ढांचा मानव कल्याण पर आधारित होना चाहिए।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हाल ही में संपन्न वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन,जहां 86 देशों ने समावेशी तकनीक के समझौते पर हस्ताक्षर किए।यह सिद्ध करता है कि भारत इस क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व कर रहा है।कहा कि “हमारा ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है।बल्कि एक ऐसी डिजिटल क्रांति का नेतृत्व करना है जो पूरी तरह से मानव-केंद्रित हो।”
एकात्म मानव दर्शन को रेखांकित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के लिए ‘विरासत’ और ‘विकास’ की गति साथ-साथ चलनी चाहिय।देश के प्रमुख शिक्षाविदों ने भी डिजिटल परिवर्तन पर अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम को बीबीयू लखनऊ के कुलपति प्रो0 आर के मित्तल,जेएनयू की कुलपति प्रो0 शांतिश्री धूलिपुडी पंडित,रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर,पीवीएसएम, एवीएसएम,वीएसएम,रिटायर्ड मेजर जनरल आर पी एस भदौरिया,वीएसएम,प्रो0 अशोक कुमार नागावत,कुलपति,दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय,प्रो0 अशोक किमर चक्रवाल,कुलपति,गुरु घासीदास विश्वविद्यालय,प्रो0 हेमचन्द्र जैन,प्राचार्य, दीनदयाल उपाध्याय महाविद्यालय,दिल्ली विश्वविद्यालय,महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो0 नारायणलाल गुप्ता,राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर,सह-संगठन मंत्री गुंथा लक्ष्मण,सचिव प्रो0 गीता भट्ट,प्रो0 वीरेंद्र भारद्वाज,प्राचार्य, शिवाजी महाविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की विशिष्ट उपस्थिती रही।



