रिपोर्ट- संतोष तिवारी!
जिस दरोगा ने कोर्ट में खुद का डेथ सर्टिफिकेट लगा खुद को किया मृत साबित, अधिवक्ता ने उसका जीवित रहते किया श्राद्ध!
चौदह वर्ष पूर्व जनेऊ तोड़कर अधिवक्ता ने लिया था मृत दरोगा रामचंद्र सिंह को खोजने का संकल्प!
मृत दरोगा रामचंद्र सिंह की खोज हुई पूरी, तो अधिवक्ता ने फिर से पहना जनेऊ, अब दरोगा का गयाजी में किया श्राद्ध!
मुजफ्फरपुर :- जिले के चर्चित मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस.के.झा ने दरोगा रामचंद्र सिंह के जीवित रहते उसका हिन्दू रीति-रिवाज से गयाजी में श्राद्ध कर दिया। विदित हो कि करीब 14 वर्ष पूर्व दरोगा रामचंद्र सिंह ने कोर्ट में खुद का डेथ सर्टिफिकेट लगा खुद को मृत साबित कर दिया था और अधिवक्ता एस.के.झा को चुनौती देते हुए कहा था कि जो कर सकते हो, कर लो, लेकिन मुझे कभी जीवित साबित नहीं कर पाओगे और इसके बाद से ही वह ‘ट्रेसलेस’ हो गया। तब अधिवक्ता ने अपना जनेऊ तोड़कर यह संकल्प लिया था कि मृत दरोगा रामचंद्र सिंह को जीवित साबित करने के बाद ही दुबारा जनेऊ धारण करेंगे। दरोगा के गायब होने के बारह वर्ष के पश्चात जब अधिवक्ता ने उसे जिन्दा ढूंढ़ निकाला, तब जाकर उन्होंने जनेऊ धारण किया। चूँकि दरोगा कोर्ट के रिकॉर्ड में आज भी मृत है, अतः अधिवक्ता ने संकल्प के चौदह वर्ष पूरे होने पर दरोगा रामचंद्र सिंह का गयाजी में आज विधिवत श्राद्ध कर दिया। विदित हो कि यह श्राद्ध कर्म आज गयाजी में विधिवत सम्पन्न हुआ है, जहाँ पर मृत आत्मा की शांति हेतु पिंडदान भी किया गया और ब्राह्मणों को भोजन भी कराया गया। अधिवक्ता श्री झा ने कहा कि यह श्राद्ध, श्राद्ध से अधिक वर्तमान प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था पर प्रहार है, जिसमें एक निर्दोष को पुलिस पदाधिकारी के गलत अनुसन्धान का खामियाजा सालों जेल में बिता कर चुकाना पड़ता है और गलत अनुसन्धान करने वाला दरोगा जीवित रहते हुए न्यायालय को खुद के मृत्यु की सूचना दे देता है और उसके विभाग को सारी जानकारी देने पर भी विभाग उसपर कोई कार्रवाई नहीं करता, न ही न्यायालय उसे कोई सजा फरमाता है। अब शायद यह श्राद्ध ही ऐसी प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था को सचेत कर सकता है।
विदित हो कि वर्ष 2012 में मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के नेउरी गाँव निवासी अनंत राम, जो कि सरकारी विद्यालय में शिक्षक थे, उन्हें झूठे रेप केस में फँसा दिया गया। उस केस का जाँच पदाधिकारी रामचंद्र सिंह को नियुक्त किया गया। रामचंद्र सिंह ने मामले में गलत अनुसन्धान करते हुए शिक्षक अनंत राम को पकड़ कर जेल भेज दिया और उसके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर दिया। अदालत में अनंत राम का ट्रायल शुरू हुआ। ट्रायल के दौरान ही मुकदमे की सच्चाई सामने आ गई और रामचंद्र सिंह का झूठ सामने आ गया। तब कोर्ट ने दरोगा रामचंद्र सिंह को गवाही के लिए कोर्ट में बुलाया। रामचंद्र सिंह को पता चल गया कि कोर्ट में उसकी पोल खुल जाएगी, तब दरोगा रामचंद्र सिंह ने एसएसपी मुजफ्फरपुर के माध्यम से अपनी पत्नी की मदद से कोर्ट में अपना डेथ सर्टिफिकेट जमा करा दिया, जिसमें रामचंद्र सिंह की मृत्यु -तिथि 15.12.2009 लिखा हुआ था, जबकि रामचंद्र सिंह द्वारा इस कांड का अनुसन्धान 2012 में किया गया था। अधिवक्ता श्री झा ने इसे पकड़ लिया और उन्होंने सवाल खड़ा किया कि 2009 में मरा हुआ व्यक्ति 2012 में अनुसन्धान कैसे कर सकता है। जब दरोगा रामचंद्र सिंह का झूठ न्यायालय के समक्ष खुला और न्यायालय ने जाँच का आदेश दिया तो दरोगा रामचंद्र सिंह ने अपना ट्रांसफर करा लिया और कोर्ट की नजर में ‘ट्रेसलेस’ हो गया, उसके विभाग ने भी उसकी कोई जानकारी देने में असमर्थता प्रकट की। बावजूद इसके कोर्ट ने उसी अनुसन्धान के आधार पर शिक्षक अनंत राम को सात साल की सजा सूना दी। बाद में पटना हाई कोर्ट ने अनंत राम के मामले की सुनवाई करते हुए उसे बाइज्जत रिहा कर दिया और शिक्षक अनंत राम को उसकी नौकरी भी वापस मिल गई। उस समय राष्ट्रीय व बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग में पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के.झा ने अपना जनेऊ तोड़ कर यह संकल्प लिया था कि जबतक दरोगा रामचंद्र सिंह को ढूंढ़, उसकी सच्चाई को जगजाहिर नहीं कर देते, तब तक जनेऊ धारण नहीं करेंगे और बारह वर्ष बीतने पर दरोगा रामचंद्र सिंह की सच्चाई प्रमाण सहित सामने लाने के बाद श्री झा ने पुनः जनेऊ धारण किया। इस क्रम में अधिवक्ता श्री झा ने दरोगा रामचंद्र सिंह की पूरी कुंडली खंगाल ली। चूँकि दरोगा कोर्ट के रिकॉर्ड में आज भी मृत है, अतः अधिवक्ता ने संकल्प के चौदह वर्ष पूरे होने पर दरोगा रामचंद्र सिंह का गयाजी में आज विधिवत श्राद्ध भी कर दिया, जबकि दरोगा रामचंद्र सिंह आज भी जीवित है। बताते चले कि रामचंद्र सिंह अरवल जिले के कुर्था थाने के गौहरा गाँव के मूल निवासी है, जो पटना में रहते है।




