समस्तीपुर- थाना में चौकीदारों और निजी कर्मियों की भूमिका पर सवाल!

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रिपोर्ट- अरविंद कुमार

उजियारपुर थाना में चौकीदारों और निजी कर्मियों की भूमिका पर सवाल, थाना संचालन को लेकर उठी पारदर्शिता की मांग।

उजियारपुर (समस्तीपुर)।
उजियारपुर थाना में थाना संचालन, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि थाना के नियमित दायित्वों के अलावा चौकीदारों के साथ-साथ निजी कर्मी भी थाना के विभिन्न कार्यों में संलिप्त देखे जा रहे हैं, जो नियमों और प्रक्रियाओं पर सवाल खड़ा करता है।
सूत्रों के अनुसार, थाना परिसर में ऐसे दृश्य सामने आ रहे हैं जहां गैर-अधिकृत कर्मियों की भूमिका केवल सहायक तक सीमित नहीं रहकर कार्यालयीन कार्यों, दस्तावेजों के संधारण और अन्य प्रक्रियात्मक गतिविधियों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि थाना स्तर पर निर्धारित जिम्मेदारियों और अधिकारों का पालन किस हद तक किया जा रहा है।
थाना क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि चौकीदारों की वास्तविक कर्तव्य-सीमा क्या है और उन्हें किन कार्यों तक सीमित रखा जाना चाहिए। साथ ही, भूमि विवाद से जुड़े मामलों, जनता दरबार की प्रक्रिया, फाइलों के रख-रखाव और पक्षकारों से संवाद की जिम्मेदारी किन अधिकारियों या कर्मचारियों को सौंपी गई है, इस पर भी स्पष्टता की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना जैसे संवेदनशील संस्थान में यदि निजी व्यक्तियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ती है, तो इससे न केवल कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगता है बल्कि निष्पक्षता और पारदर्शिता भी प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि थाना संचालन को लेकर नियमों के अनुपालन और जिम्मेदारियों की स्पष्ट रेखा तय करने की मांग जोर पकड़ रही है।
पूरे मामले ने क्षेत्र में चर्चाओं को और तेज कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक स्तर पर इन सवालों को लेकर क्या स्थिति स्पष्ट की जाती है और थाना व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाती है।

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