अस्पताल में सफाईकर्मी और निजी एंबुलेंस चालक मरीजों का इलाज करते पाए गए, स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा!

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रिपोर्ट- ऋषभ कुमार!

वैशाली के हाजीपुर सदर अस्पताल के एक स्टिंग ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल में सफाईकर्मी और निजी एंबुलेंस चालक मरीजों का इलाज करते पाए गए, जबकि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरत रहे थे। सिविल सर्जन अपने अस्पताल के प्रति खुद लापरवाह देख रहे हैं, और शहर के अस्पतालों में काम या तलाश रहे हैं। अब यह वीडियो फोटो सामने आने के बाद सिविल सर्जन क्या रुख अपनाते हैं यह देखने वाली होगी।

एक मामले में, अस्पताल में आउटसोर्स एजेंसी के सफाईकर्मियों का सुपरवाइजर प्रभात एक भर्ती मरीज का इलाज करते हुए देखा गया। प्रभात न तो डॉक्टर है और न ही पैरामेडिकल स्टाफ।

एक अन्य घटना में, सदर अस्पताल में कार्यरत जीएनएम पुष्पा ड्यूटी के दौरान मोबाइल पर चैटिंग करती नजर आईं। उनका काम डॉक्टर के निर्देशानुसार मरीजों का इलाज और देखभाल करना है, लेकिन वे अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाह दिखीं।

तीसरे मामले में, एक निजी एंबुलेंस चालक संजय मरीजों को इंजेक्शन लगाते हुए पाया गया। यह शख्स 24 घंटे में 12 घंटे सदर अस्पताल में रहता है और मौका मिलते ही मरीजों को पटना या हाजीपुर के निजी अस्पतालों में ले जाकर कमीशन बटोरने में माहिर है। वह रानू कुमारी (31 वर्ष, पति धर्मेंद्र कुमार, रसूलपुर ओस्ती, महुआ थाना क्षेत्र) नामक एक मरीज को इंजेक्शन लगा रहा था।

इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन, जो आमतौर पर अन्य अस्पतालों में कमियां ढूंढते हैं, मौन हैं।

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