:- रवि शंकर अमित!
कला एवं संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन बेगूसराय तथा बिहार कला मंच, पटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी “अभिव्यंजना” का आज दूसरा दिन प्रेक्षागृह, कंकौल में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। भीषण ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में कला प्रेमी एवं दर्शक प्रदर्शनी देखने पहुँचे और कलाकारों से संवाद कर कलाकृतियों की बारीकियों को समझा।
आज प्रदर्शनी का अवलोकन जिला खेल पदाधिकारी श्री बिट्टू कुमार द्वारा किया गया। इन्होंने प्रदर्शनी में प्रदर्शित कलाकृतियों की सराहना करते हुए कलाकारों के रचनात्मक प्रयासों की प्रशंसा की।
इस प्रदर्शनी में बेगूसराय के कलाकार वीरेंद्र कुमार नागर द्वारा लुप्तप्राय होती जा रही पटना कलम (कंपनी शैली) को पुनर्जीवित करने का सराहनीय प्रयास प्रस्तुत किया गया है। उनकी पेंटिंग्स “पॉपकॉर्न बेचती लड़की” और “बेबी कॉर्न बेचती महिला” में पटना कलम की जीवंत झलक दिखाई देती है। इस संदर्भ में पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ कलाकार प्रो. श्याम शर्मा ने भी कलाकार के प्रयास की प्रशंसा की।
वरिष्ठ कलाकार इंद्रमोहन प्रसाद ने अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों—जैसे भ्रूण हत्या, गरीबी और दहेज प्रथा—को उजागर करते हुए इन्हें जड़ से समाप्त करने का सशक्त संदेश दिया है।
मूर्तिकार मनीष कुमार कौशिक द्वारा निर्मित श्वेत मार्बल की मूर्ति “खुशी” दर्शकों का विशेष आकर्षण रही, जिसमें बादलों पर आनंद और उल्लास में उड़ती एक महिला आकृति को दर्शाया गया है।
वहीं प्रवीण कुमार की ब्रास मूर्ति में योग के माध्यम से संतुलन को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने दर्शकों को मिट्टी की मूर्ति से ब्रास मूर्ति बनने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी भी दी।
मनोज कुमार साहनी की पेंटिंग में पृथ्वी को माँ के रूप में चित्रित करते हुए अंधाधुंध वृक्ष कटाई से उत्पन्न वैश्विक असंतुलन और वन्यजीवों के विलुप्त होने के खतरे को दर्शाया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देती है।
इसके अतिरिक्त राजीव कुमार शर्मा की पेंटिंग में माँ और बच्चे का भावनात्मक चित्रण, मिनल कुमारी की मिथिला पेंटिंग में राधा–कृष्ण तथा मनीष कुमार की मिथिला शैली में राम विवाह का दृश्य दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है।
यथार्थवादी चित्रकला के अंतर्गत वाटरकलर माध्यम में स्टिल लाइफ एवं लैंडस्केप चित्रों के माध्यम से कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, बेगूसराय श्री श्याम कुमार सहनी ने कला के व्याकरण, प्रशिक्षण और उसकी उपयोगिता को अपनी सशक्त अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया।
यह प्रदर्शनी केवल कलाकृतियों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने, प्रकृति से प्रेम और संतुलन का संदेश देने का सशक्त माध्यम भी है, जो यह सिद्ध करती है कि कला समाज का सजीव आईना है।




