:- रवि शंकर अमित/गोविंद कुमार!
बिहार बंद के दौरान पहली बार किसी ऐसे बंद को देखा गया जिसमें आम जनता ने भी सहयोग किया जो यात्री आवागमन कर रहे थे उन्होंने रुक कर कार्य करता हूं नेताओं के साथ इस बंद को सफल बनाने की कोशिश भी कि हमने कई लोगों से बात की तो उन्होंने कहा मां तो मां होती है किसी की मन हो और इसलिए हम लोग खुद यहां आकर रुक गए और जब तक यह कहेंगे हम रुके रहेंगे और इनका हम समर्थन करते हैं सम्मान करते हैं क्योंकि यह बंद जो है वह मां के सम्मान में कराया गया है तो इस तरह से मोकामा के औटा जीरो माइल में गोल चक्कर के पास एक बड़े बंद का आयोजन किया गया था, इस कारण NH 80,NH 31 और नई सिक्सलेन सेतु तथा राजेंद्र सेतु से आवागमन स्वतः बाधित हो गया, लंबी-लंबी गाड़ियों की कतारें देखी गई चारों तरफ,हालांकि उसमें इमरजेंसी सेवा को छूट दी गई थी एंबुलेंस दूध की गाड़ी खाने-पीने की वस्तुएं ऐसी गाड़ियों को आने-जाने की सुविधा दी गई थी लेकिन लोगों द्वारा जिस प्रकार से पहली बार स्वत बंद का समर्थन करते देखा गया यह बेहद आश्चर्जनक है और आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है!
Byte – बंद समर्थक
Byte – यात्री




