पंकज का पंच

चौपाल चल रहा है, भोजन की शानदार व्यवस्था के साथ, दक्षिणा!
तो क्या इस बार धन और बल के सहारे इस बार पंचायत चुनाव की सरकार हर जगह दक्षिणा से लेकर खानपान का उत्तम प्रबंध वर्तमान मुखिया जी से लेकर नए प्रत्याशी भी पूरी लाव लश्कर के साथ पहुंच रहे हैं। वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद तक की, अलग-अलग जगह पर अलग-अलग गांव में भंडारा चल रहा है। तो कई मुखिया जी रात के दस्तक देते ही, काली करतूत और काले कारनामे को छुपाने के लिए, दनादन गांव में प्रवेश, तो बोर के दस्तक देने से पहले चेहरे को बेदाग भी कर लेते हैं। राजनीति के हुक्मरान सौदा तय करने में लगे हुए हैं। दरअसल पंचायत चुनाव चल रहा है ग्रामीणों के लिए कोई उत्सव से कम नहीं मिला है यह। तो नेताजी रात के अंधेरे में जातिगत गणित की गुणा भाग निकाल रहे हैं। ऐसे में जनता सभी दलों के समर्थन में है। लेकिन जनता की खामोशी, और आंखें बहुत कुछ बयां करती है। यह मैं नहीं कहता हूं यह पूरे बिहार टाइप की रिजल्ट जवाब दे रहा है। जहां 90% पुराने चेहरे को जनता ने नकार दिया और उसे सत्ता हीन कर दिया। तू युवा ब्रिगेड की परचम लहरा गई। ऐसे में इस बार पंचायत चुनाव की बिहार राजनीति बहुत कुछ बयां कर रहा है। कई ऐसे पंचायत हैं जहां त्रिकोणीय संघर्ष है, जबरदस्त उछाल चल रहा है, तो पोस्टर वार के जरिए संवेदनशील वोटरों को साधने की तैयारी भी, अब ऐसे में फिलवक्त ऊंट किस करवट बैठेगा यह कहना जल्दबाजी होगा।इधर जुबानी जंग भी तेज हो गई है, तो मुखिया जी से लेकर छूट गई है नेता तक का सोशल मीडिया सहारा बना हुआ है। रात के 8:00 बजते हैं गांव के सुनसान जगह में चौपाल सजा है। जहां तारणहार कृपा निधान, वादों की जबरदस्त बम बाजी तो दावों की ऐसी आसमानी फायरिंग माननीय माननीय पुरस्कार लेकर आएं हैं। नेताजी एक बार पीठ के पीछे भागते हैं। भूत की खुराक का अनुमान लगभग सही है। नेताजी फिर पद आसीन, आंखों में धूल झोंकने की पूर्ण तैयारी भले ही अपने तारणहार कृपा निधान हर सरकारी योजना के कार्य में फिसड्डी रूपी पुरस्कार से सम्मानित हैं। हम तो बोलेंगे इसीलिए सवाल है जनता के उस पथराई आंखों को जो पिछले वर्ष किए गए। और वह वादा मुखिया जी के गाड़ी के उड़े धूल से ढक गई।




