शंखनाद ब्यूरो

भागलपुर : दुनिया में किसी भी चिकित्सा प्रणाली की एक सीमा है और उसके साइड इफेक्टस हैं,लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति की संभावनाएं असीम है.इसके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते हैं.
उक्त बातें बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने शनिवार की देर शाम को भागलपुर स्थित तपोवर्धन प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में अपने भ्रमण के दौरान कही.उन्होंने कहा कि एक कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को अपनी औकात बता दी और सारे विज्ञान व मशीन धरे के धरे रह गए.पूरी दुनिया को दरवाजे के अंदर बंद कर दिया.उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से बचने के लिए जिस एलोपैथ रेमडेसीविर दवा को कारगर बताया जा रहा था,आज उसके साइड इफेक्ट से लोगों की किडनी खराब होने की शिकायत सामने आ रही है. मौजूदा हालात में प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है,क्योंकि इसके तहत प्रकृति प्रदत धूप, हवा, पानी, मिट्टी आदि से लोगों का इलाज किया जाता है.
शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि, आज हमलोगों को प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को देखने और महसूस करने की जरूरत है.एलोपैथ और होम्योपैथ आदि चिकित्सा पद्धति बाहर से आयातीत है,लेकिन भारत की अपनी चिकित्सा प्रणाली प्राकृतिक चिकित्सा को तपोवर्धन ने जिंदा रखा है और इसके प्रचार-प्रसार की कोशिश में वह लगा हुआ है.इसके लिए उन्होंने तपोवर्धन प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र के संस्थापक अध्यक्ष गिरिधर गुप्ता एवं संचालक जेता सिंह को बधाई और शुभकामनाएं दी और कहा कि भागलपुर के तपोवर्धन के बारे में उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सुना था,तभी से उनके मन में इस परिसर को देखने समझने की जिज्ञासा बनी हुई थी.यहां आने के लिए कोई निर्धारित कार्यक्रम नहीं था, लेकिन जब रविवार को टीएनबी में होने वाले पूर्ववर्ती छात्रों के कार्यक्रम का निर्धारण हुआ तो उन्होंने जेता सिंह से तपोवर्धन परिसर को देखने की इच्छा जताई और यहां आ गया और यहां आने पर सुखद अनुभूति हुई.उन्होंने तपोवर्धन के प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण सत्र समाप्त होने पर मिले प्रमाणपत्र का भी वितरण किया.इसके बाद उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में किस तरह के उपकरण व विधि का उपयोग किया जाता हैं,इसका अवलोकन किया.कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से इलाज करा रहे मरीज व स्वस्थ हुए लोग और तपोवर्धन केंद्र के कर्मी आदि मौजूद थे.




