रिपोर्ट- अमित कुमार!
जातीय जनगणना को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जातीय गणना की पहल आज की नहीं बल्कि नीतीश कुमार की वर्षों पुरानी सोच का परिणाम है, जिसे अब कुछ दल जबरन क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे हैं।
अशोक चौधरी ने कहा:
“जब सर्वदलीय बैठक हो रही थी, तब हमारे नेता नीतीश कुमार के बीते 10 सालों के भाषणों को देखें – चाहे वो संसद में हो या किसी सार्वजनिक मंच पर – उन्होंने हमेशा जातीय जनगणना को लेकर स्पष्ट सोच रखी है। उस समय उन्होंने बीपी सिंह और ज्ञानी जैल सिंह जैसे नेताओं से इस पर बात की थी।”
“कई सरकारों ने जातीय गणना की कोशिश नहीं की, लेकिन नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को लगातार उठाया और जब वे इंडिया गठबंधन का हिस्सा थे, तब भी मुंबई बैठक में उन्होंने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की बात रखी थी। लेकिन उस मंच पर कांग्रेस और अन्य दलों ने हमारा साथ नहीं दिया। राहुल गांधी, लालू यादव और तेजस्वी यादव उस समय मंच पर मौजूद थे, लेकिन चुप रहे।”
बीजेपी के साथ आने के बाद नीतीश कुमार ने उठाया ठोस कदम:
“जब भारतीय जनता पार्टी के साथ नीतीश कुमार फिर से आए, तब उन्होंने सरकारी खर्च पर जातीय जनगणना कराने का निर्णय लिया और योजना को सफलतापूर्वक लागू भी किया।”
विपक्ष पर कटाक्ष:
“जो दल बीच में एक साल या सात महीने सरकार में रहकर क्रेडिट लेना चाहते हैं, वे दिवाली जैसे सिर्फ पटाखा फोड़ने में लगे हैं। सिर्फ उत्सव मनाने से हक नहीं मिलता, विचार और नेतृत्व जरूरी होता है।”
उन्होंने कहा:
“जनसंख्या के अनुपात में हिस्सेदारी की लड़ाई आज से नहीं लड़ी जा रही है। यह कर्पूरी ठाकुर और ज्ञानी जैल सिंह जैसे नेताओं की सोच का विस्तार है, जिसे बिहार में नीतीश कुमार ने जमीन पर उतारा।”
नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुई जनगणना को बताया ऐतिहासिक: “बिहार में जातीय गणना सरकारी खर्च पर कराना एक ऐतिहासिक निर्णय था। लेकिन आज कुछ लोग इस पर सवाल उठाकर उसके आंकड़ों को झूठा कह रहे हैं। ऐसे बयान दुर्भाग्यपूर्ण हैं।”




