:- रवि शंकर अमित!
- प्रधानमंत्री का नेतृत्व और बिम्सटेक को नई गति: भले ही बिम्सटेक की स्थापना वर्ष 1997 में हुई थी लेकिन इस समूह को असली गति 2016 के बाद मिली जब प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान गोवा में ‘लीडर्स रिट्रीट’ के लिए बिम्सटेक देशों को आमंत्रित करने की विशेष पहल की। इसके बाद, उन्होंने इस समूह को मजबूत करने और इसके माध्यम से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग पर व्यक्तिगत और विशेष ध्यान दिया है। वर्ष 2019 में, उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह के लिए बिम्सटेक नेताओं को आमंत्रित किया।
- प्रधानमंत्री का विजन और नीतियां बिम्सटेक में गतिशीलता ला रही हैं: बिम्सटेक समूह अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत के नेतृत्व पर निर्भर करता है। भारत के नेतृत्व में, प्रधानमंत्री का पड़ोस पहले नीति, एक्ट ईस्ट नीति, महासागर विजन और हिन्द-प्रशांत के लिए विजन ब्रिक्स समूह को अतिरिक्त गतिशीलता प्रदान करता है। भारत की इन नीतियों के चलते सदस्य देशों में तालमेल तो बना ही है, इससे सदस्य देश लाभान्वित भी हुए हैं।
- प्रधानमंत्री के निर्देशन में बिम्सटेक को एक मजबूत संस्थागत आधार मिल रहा है: बिम्सटेक सचिवालय कुछ समय पहले स्थापित किया गया था, लेकिन संस्थागत दृष्टिकोण से संगठन को वास्तविक गति, मई 2024 में इसके चार्टर को अपनाने के बाद मिली है। इसने इसे एक अंतरराष्ट्रीय रूप दिया है, इसके मार्गदर्शक सिद्धांतों और बुनियादी संस्थागत प्रारूप को स्थापित किया है। भारत ने बहुपक्षीय कार्य के व्यापक अनुभव वाले राजनयिक श्री इंद्र मणि पांडे को महासचिव नियुक्त किया है। इन घटनाक्रमों से समूह के काम में नई ऊर्जा, उद्देश्य और कार्रवाई सुनिश्चित की है। भारत ने संस्था और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है। इसने इस उद्देश्य के लिए बिम्सटेक सचिवालय को 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर दिए हैं। भारत ने जुलाई 2024 में बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी की। भारत ने सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की एक अनौपचारिक बैठक की भी मेज़बानी की।
- बिम्सटेक एजेंडे का विस्तार और इसकी गहनता: भारत के नेतृत्व और निर्देशन में बिम्सटेक एजेंडे का कई गुना विस्तार हुआ है। बिम्सटेक के कार्य क्षेत्र को सात खंडों में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें प्रत्येक देश एक का नेतृत्व करता है। भारत सुरक्षा क्षेत्र का नेतृत्व करता है। अन्य क्षेत्र हैं: व्यापार, निवेश और विकास (बांग्लादेश), पर्यावरण और जलवायु (भूटान), कृषि और खाद्य सुरक्षा (म्यांमार), जन-जन के बीच संपर्क (नेपाल), विज्ञान और प्रौद्योगिकी और नवाचार (श्रीलंका), कनेक्टिविटी (थाईलैंड)
- भारत का फोकस: व्यापक विश्व कल्याण के लिए क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देना-
- सुरक्षा: भारत सुरक्षा स्तंभ का नेतृत्व करता है। इसने क्षेत्र में आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए मजबूत कानूनी ढांचा विकसित करने का काम किया है
- कनेक्टिविटी: इसके तहत भौतिक, डिजिटल और ऊर्जा के क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। भारत, बेंगलुरु में बिम्सटेक ऊर्जा केंद्र की मेजबानी करता है। केंद्र सरकार बिम्सटेक क्षेत्रीय ग्रिड इंटर-कनेक्शन बनाने की दिशा में सभी से तालमेल भी करता है। यह पीएम के ‘एक विश्व, एक सूर्य, एक ग्रिड’ विजन के अनुरूप है।
- स्थिरता और आपदा प्रबंधन: भारत वैश्विक स्थिरता एजेंडे में योगदान देने के लिए बिम्सटेक की सहायता कर रहा है। भारत सदस्य देशों के बीच नियमित आपदा प्रबंधन अभ्यास आयोजित करता है। प्राकृतिक आपदाओं के प्रति क्षेत्र की संवेदनशीलता के कारण समूह के सहयोगात्मक कार्य का यह पहलू बहुत लोकप्रिय रहा है। भारत, नोएडा में मौसम और जलवायु के लिए बिम्सटेक केंद्र की भी मेजबानी करता है।
- बिम्सटेक की सक्रियता: भारत के नेतृत्व में, बिम्सटेक ने लोगों के बीच आपसी संबंधों और क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए गतिविधियों में तेजी देखी है। प्रधानमंत्री ने युवाओं को जोड़ने, संस्कृति को बढ़ावा देने और पर्यावरण की रक्षा को उच्च प्राथमिकता दी है। बिम्सटेक में इन पहलुओं पर उचित ध्यान दिया जा रहा है। हाल ही में की गई कुछ गतिविधियां इस प्रकार हैं:
- फरवरी 2024 में दिल्ली में बिम्सटेक एक्वेटिक चैंपियनशिप
- अगस्त 2024 में दिल्ली में बिम्सटेक बिजनेस समिट
- नवंबर 2024 में कटक में बाली यात्रा में बिम्सटेक सांस्कृतिक मंडली की भागीदारी
- फरवरी 2025 में सूरजकुंड मेले में बिम्सटेक मंडप
- फरवरी 2025 में अहमदाबाद में बिम्सटेक युवा शिखर सम्मेलन
- फरवरी 2025 में दिल्ली में बिम्सटेक युवाओं के नेतृत्व में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन
- फरवरी 2024 में बिम्सटेक-भारत समुद्री अनुसंधान नेटवर्क का शुभारंभ
- बैंकॉक में बिम्सटेक: वर्ष 2016 में गोवा में बिम्सटेक के लिए प्रधानमंत्री के दिए निर्देश इस समूह के एजेंडे को निरंतर रूप से आकार दे रहा है। ‘गोवा रिट्रीट’ के दो निर्णयों को बैंकॉक में जारी किया जा रहा है – पहला, बिम्सटेक विजन 2030 को अपनाना तथा दूसरा, बिम्सटेक विशिष्ट व्यक्तियों के समूह की रिपोर्ट को अपनाना।




