रिपोर्ट-अमित कुमार!
“बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान विभाग ने ‘ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम’, ‘मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना’, ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना’, और ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के तहत किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की।
ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम:
पंचवर्षीय रूटीन अनुरक्षण की अवधि समाप्त हो चुके पथों के पुनर्निर्माण के लिए यह योजना लागू की गई है।
अगले 7 वर्षों तक सड़कों की राइडिंग क्वालिटी बनाए रखने और दो बार कालीकरण का प्रावधान किया गया है।
14860 पथों (26700 किमी) पर 21500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इस योजना के तहत संवेदकों को Rapid Response Vehicle रखना अनिवार्य होगा।
मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना:
100 से अधिक आबादी वाले अनजुड़े बसावटों को जोड़ने का लक्ष्य।
2024-25 में 6795 करोड़ रुपये की लागत से 2586 बसावटों के लिए 5480 किमी पथ स्वीकृत।
अगले दो वर्षों में 8435 बसावटों को जोड़ने की योजना।
मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना:
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध संपर्कता के लिए पुलों का निर्माण।
2024-25 में 3000 करोड़ रुपये और 2025-26 में 2000 करोड़ रुपये की लागत से पुलों की स्वीकृति।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना:
100 मीटर तक के पुल ग्रामीण कार्य विभाग और उससे अधिक लम्बाई के पुल बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा बनाए जाएंगे।
बिहार ने 2016-17 और 2017-18 में ग्रामीण सड़कों के निर्माण में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
नवीनतम प्रगति:
अब तक 12800 पथों का टोपोग्राफी सर्वे और 11350 पथों का ट्रैफिक सर्वे पूरा।
4300 पथों का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) स्वीकृति के लिए तैयार।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 10000 किमी पथ निर्माण का लक्ष्य।
बाइट:
ग्रामीण कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह योजनाएं राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर आवागमन और विकास से जोड़ने के लिए मील का पत्थर साबित होंगी।”
एंकर:
“इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से बिहार के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से राजधानी पटना तक अधिकतम 5 घंटे में पहुंचने का सपना साकार होगा। ग्रामीण कार्य विभाग की इन पहलों से न केवल संपर्कता बेहतर होगी, बल्कि राज्य के विकास को भी नई गति मिलेगी।”




