लचर सिस्टम बदहाल अस्पताल, अस्पताल तो है मगर डॉक्टर नहीं,मुख्यमंत्री के द्वारा बनाया गया बुनियादी केंद्र भगवान भरोसे !

SHARE:

निभाष मोदी, भागलपुर

पूरे देश में सरकारी अस्पताल हो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हों या बुनियादी केंद्र, सबों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है !आए दिन अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली व अराजकता की खबरें अखबार की सुर्खियों में आप पढ़ते रहते हैं परंतु बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का क्या बुरा हाल है आप बयां भी नहीं कर सकते ,तो दूसरी ओ इन्हीं क्षेत्रों में निजी अस्पतालों की चांदी ही चांदी है! सरकारी डॉक्टर प्राइवेट क्लीनिक खोलकर अपनी दुकान चमकाने में मुस्तैद है, हैरानी की तो बात यह है कि सरकारी अस्पताल की चारदीवारी से लेकर मेन गेट तक भले ही बड़े बड़े अक्षरों में लाखों रुपए खर्च करा कर नारे लिखे हैं,बड़े-बड़े होर्डिंग और पोस्टर लगे होते हैं लेकिन अंदर स्वास्थ्य सेवा के नाम पर अनमने ढंग से मरीजों का इलाज किया जाता है! इतना ही नहीं डॉक्टर से लेकर सफाई कर्मी तक की कोशिश होती है कि मरीज उनके कमीशन प्राप्त प्राइवेट अस्पताल चले जाएं तो हमारी भी कुछ कमाई हो जाए!

ताजा मामला पीरपैंती प्रखंड के ब्लॉक परिसर का है! भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड में ब्लॉक परिसर में बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के द्वारा एक बुनियादी केंद्र बनाया गया है जहां 60 साल से ज्यादा उम्र वाले का फ्री में इलाज तथा तरह तरह के व्यायाम कराए जाते हैं लेकिन ना तो सही ढंग से कोई इलाज हो पाता है और ना ही एक भी डॉक्टर व्यायाम कराते हैं ।।
ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा अधिकारी ने सारी बात बताई बुनियादी केंद्र में कार्यरत प्रियंका कुमारी, रजनीश प्रभा,और कुमार साहब ,तथा शेखर कुमार हैं ।
जितनी भी बुजुर्ग और गरीब लोग आते हैं उन्हें डांट कर भगा दिया जाता है और अभद्र भाषा का व्यवहार किया जाता है अगर सरकारी कर्मचारी या फिर डॉक्टर जिनको भगवान का रूप माना जाता है अपने पेसेंट से इस तरह का दुर्व्यवहार करेंगे तो हमारे देश का विकास कैसे हो पाएगा ।
सुरक्षा बल ने सारी सच्चाई से अवगत कराएं और यह भी बताया एक भी डॉक्टर ड्यूटी नहीं करते हैं तथा बैठकर हंसी मजाक में मशगूल रहते हैं ।
और रोगियों के घर पर जाकर देखने का काम करते हैं बदले में ₹500 फीस की मांग करते हैं क्या सरकार इन्हें इस चीज के लिए तनख्वाह देती है इन सभी भ्रष्टाचारियों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए तथा नए डॉक्टरों की बहाली की जाए अगर सुरक्षा बल उन्हें ऐसा ना करने की सलाह देते हैं तो उनको यहां से ट्रांसफर कराने की धमकी दी जाती है ।
यह स्थिति केवल यही कि नहीं है यह तो एक इशारा मात्र है, इसके अलावे हर प्रखंड, हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बैठने वाले डॉक्टर भी अपना निजी क्लीनिक चलाने में मशगूल रहते हैं, अस्पताल प्रशासन की लापरवाही वदइंतजाम ई और कुव्यवस्था के कारण गरीब मरीज भी निजी क्लीनिक में इलाज कराने को मजबूर हो जाते हैं! बताते चलें कि देश में लगभग 10,628 सरकारी अस्पताल 23,391 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 1,45,894 प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र हैं!
जिन पर लाखों लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल की जिम्मेदारी है इन पर प्रत्येक साल बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने व रखरखाव के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जाते हैं इसके बावजूद सरकारी अस्पताल में डॉक्टर दवा और जांच नदारद है इससे हम क्या अनुमान लगा सकते हैं?

Join us on:

Leave a Comment