रिपोर्टर — राजीव कुमार झा
मधुबनी जिले के विभिन्न अस्पतालों से प्रसव के दौरान नवजात की मौत की खबर आती ही रहती है। फिर एक बार बेनीपट्टी अनुमंडल अस्पताल में लापरवाही देखने को मिला है़। जहां स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही से एक नवजात की मृत्यु होने का मामला प्रकाश में आया है़। प्राप्त जानकारी के अनुसार खिरहर थाना क्षेत्र के सोनइ गांव के विजेंद्र कामत की पत्नी पूनम देवी गर्भवती थीं। शुक्रवार की सुबह करीब 7-8 बजे के बीच परिजनों द्वारा उन्हें बेनीपट्टी अनुमंडलीय अस्पताल के प्रसव कक्ष में भर्ती कराया गया। भर्ती होने के बाद महिला को पानी चढ़ाया गया, जहां 11-12 बजे के करीब महिला का डिलीवरी हुआ। लेकिन, जब नवजात का जन्म हुआ तो वहां लेबर रूम में तैनात जीएनएम द्वारा मृत नवजात के जन्म लिए जाने की बात परिजनों को बतायी गई। जिसके बाद परिजन दहाड़े मार मार कर रोने लगे और अस्पताल कर्मियों पर लापरवाही बरतने जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। महिला के ससुर राम चरितर कामत ने स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही से नवजात की मृत्यु का आरोप लगाया है़। उन्होंने बताया कि इसी अस्पताल में तीन चार दिन पहले उनकी पुत्रवधू की स्वास्थ्य जांच करवाई गयी थी। उस समय जांच में बच्चा सकुशल था। शुक्रवार की सुबह भर्ती होने के बाद तक बच्चा ठीक था, लेकिन प्रसव के बाद कहा गया की मृत बच्चा ने जन्म लिया है़। एक जीएनएम द्वारा यह भी कहा गया कि बच्चा पांच दिन पहले से मरा हुआ था, जो पूर्ण रूप से झूठ है़। अगर बच्चा गर्भ में पांच दिनों से मृत अवस्था में रहता तो उसकी माँ का क्या हाल होता अनुमान लगाया जा सकता है़, और अगर बच्चा मरा हुआ भी था तो मेरी पुत्रवधू को भर्ती क्यों किया गया? रेफर क्यों नहीं किया गया? सच्चाई तो यह है़ की प्रसव कक्ष में तैनात जीएनएम कर्मियों की लापरवाही से बच्चा मरा है़। वहीं प्रसव कक्ष में भर्ती गर्भवती महिलाओं के परिजनों ने बताया कि यहां जीएनएम स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा पूर्ण रूप से तानाशाही और लापरवाही का प्रदर्शन किया जा रहा है़। एक तो इलाज में लापरवाही बरती जाती है़ और ऊपर से बोलने पर बदतमीजी की जाती है़। बता दें कि जब यह घटना हुई उस समय प्रसव कक्ष में जीएनएम शालिनी कुमारी, स्वर्णा पांडे और लेबर रूम इंचार्ज पार्वती ड्यूटी में थीं। वहीं शुक्रवार को ओपीडी में प्रतिनियुक्त चिकित्सक डॉक्टर अमित कुमार साह ने बताया कि प्रसव के दौरान नवजात के शरीर में कोई गतिविधि नहीं देखी गई थी। वहीं, इस संबंध में अस्पताल के उपाधीक्षक डॉक्टर सुशील कुमार से पक्ष जानने के लिए दूसरे मंजिल पर अवस्थित उनके कार्यलय के समक्ष पहुंचने पर कार्यालय में ताले झूल रहे थे। साथ ही फोन से संपर्क साधने का भी प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन उठाना भी उचित नहीं समझा। बता दें कि महिला को पूर्व से ही 15 और 18 वर्ष की दो पुत्री है़।
जिले में अस्पताल की लापरवाही के कारण नवजात की मौत का खबर आए दिन आते रहने और यहां के अस्पतालों में नवजात मौत की दर काफी चौंकाने वाली है। जिसे देखते हुए ये कहना ग़लत नही होगा कि यहां के अस्पतालो मे चिकित्सा कार्य में लगातार लापरवाही वर्ती जा रही है। जिले में वे पटरी हो चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था को देखने बाला कोई नही है।




