रचना – अनमोल कुमार
पौधों की टहनियों पर लगे पीले पत्ते
मत तोड़ो तुम….!
चंद रोज में….
खुद ब खुद झड़ जाएंगे ।
बैठा करो….,
कुछ तो अपने बुजुर्गों के पास तुम,
एक दिन खुद ही ये चुप हो जाएंगे ।
खर्च ना दो…..
उन्हें बेहिसाब प्यार दो तुम यारों !
एक दिन…..,
सब तुम्हारे लिए छोड़ जाएंगे ।
मत टोको, मत रोको उनको बार बार
बात दुहराने पर…..,
एक दिन हमेशा के लिए वे ख़ामोश हो जायेंगे ।
इनका आशीर्वाद सर पर ले लिया करो तुम ,
वर्ना फ़िर ये तस्वीरों में ही नज़र आयेंगे ।
खिला दो उनको कुछ उनकी ही पसंद का…. ,
वरना फिर श्राद्ध में भी देखना वे खाने नहीं आयेंगे ।
पौधों की टहनियों पर लगे पीले पत्ते…
मत तोड़ो तुम…..।
चंद रोज मे…..|
खुद ब खुद झड़ जायेंगे




