भारत में प्राचीन समय से ही खेती करने के पूर्व बीज संस्कारित करना अनिवार्य है!

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प्रस्तुति अनमोल कुमार

*१.बीज संस्कार*

भारत में प्राचीन समय से ही खेती करने के पूर्व बीज संस्कारित करना अनिवार्य है. वर्तमान में किसान अज्ञानता, लापरवाही, आलस, मार्गदर्शन के अभाव के कारण ही भारत में बीज संस्कारित नहीं करते हैं।
बीज संस्कार की आवशयकता क्यों है?
९ बीज के अंदर के दोश बीज संस्कारित करने के बाद में पूरी तरह से दूर हो जाते हैं। संस्कारित बीज का अंकुरण बहुत ही अच्छा होता है। संस्कारित बीज से फसल निरोगी रहती है।
अग्निहोत्र की भस्म से बीज संस्कार
गोमूत्र तथा अग्निहोत्र की भस्म में कम से कम १० मिनट
भिगोकर बीजों को रखना चाहिए। गोमूत्र १० लीटर आवशयक है गोमूत्र में बहुत अधिक गुण मौजूद हैं। तथा अग्निहोत्र की भस्म में
अदभुत गुण मौजूद हैं। तथा अग्निहोत्र की भस्म के वैज्ञानिक।
परीक्षण करने के बाद बहुत सारे आशचर्यजनक तथ्य सामने आये हैं। बीज भिगने के बाद में पूरी तरह से संस्कारित हो जाते हैं।
३. जल संस्कार
जल का संस्कार करने पर जल के दोश पूरी तरह से दूर हो जाते हैं। दूशित जल किसानों के स्वास्थय के लिए भी घातक हैं। भारत में प्राचीन
समय में जल का संस्कार किया जाता था लेकिन वर्तमान समय में अज्ञानता, लापरवाही, आलस के कारण ही जल का संस्कार नहीं किया जाता है। जल में मौजूद रसायनों के कारण जल बहुत ही अधिक जहरीला है। जल संस्कार नहीं करने के कारण उत्पन्न फसल बीमार उत्पन्न हो रही है।
जल संस्कार की आवशयकता क्यों है
वर्तमान में श्री मोहनशकर जी देशपांडे के कारण जल का संस्कार भारत में अमृत पानी से किया जाता है। खेती में सिंचाई किए जाने वाले जल
में अग्निहोत्र की भस्म मिलाकर संस्कारित करना आवशयक है।
सहदेव जी भाटिया द्वारा लिखित भारतीय पौराणिक खेती पुस्तक को पढ़ें।

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