रिपोर्ट – अनमोल कुमार
गया। आज पैसे के दौर में लोग स्वयं को ही भूलते जा रहे हैं। गुरु कृपा पितामहेशवर के एक सभा कक्ष में आचार्य नवीन ने कहा कि लोग देवत्व प्रवृत्ति को छोड़कर दासत्व प्रवृत्ति को अपनाते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्रोध अपनी अक्षमता को प्रदर्शित करना करना है।
उन्होंने कहा कि दानत्व प्रवृत्ति में आवेश, काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य जैसे व्यहविचार है, इससे हमे निकलना है और मूल्य, विश्वास, गौरव, श्रद्धा, सम्मान, ममता, वात्सल्य, कृतज्ञता, स्नेह, निष्ठा और प्रेम हमे देवत्व की ओर ले जाऐगा, और हम सुख, शान्ति, प्रेम का अनुभव करेंगे।
श्र नवीन ने कहा कि हमें गलती की समीक्षा और सही का मूल्यांकन करना चाहिए।




