छपरा की पीड़िता के आवेदन से पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल!

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रिपोर्ट- संतोष तिवारी

मुजफ्फरपुर पुलिस के कार्यशैली पर कई सवाल उठ रहे हैं क्या पूरे मामले पर पुलिस पर्दा डालने का काम कर रही है इसकी एक बानगी देखिये … अहियापुर पुलिस की सुस्ती पर भी उठ रहे सवाल… छपरा की पीड़िता के आवेदन से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। कानून के जानकारों के अनुसार पुलिस जांच में शिथिलता का लाभ आरोपितों को मिल सकता है। पुलिस ने पीड़िता को थाने से लौटा दिया। इसके बाद उसने कोर्ट में परिवाद दायर किया। एसएसपी कार्यालय से 12 अप्रैल को परिवाद पत्र भेज दिया गया। लेकिन, अहियापुर पुलिस ने दो जून को आइपीसी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। इसमें ज्यादातर धाराएं गैर जमानतीय है और सभी गंभीर प्रवृति | की हैं। फिर भी पुलिस ने कोर्ट में बयान दर्ज नहीं कराया और न ही पीड़िता का मेडिकल कराया। रिकॉर्ड के मुताबिक, 12 अप्रैल को एसएसपी कार्यालय से कोर्ट परिवाद को अहियापुर थाना भेज दिया गया। अहियापुर थाना पर कोर्ट परिवाद को पहुंचने में 48 दिन से अधिक लग गये। सवाल उठ रहा कि क्या मैसेंजर को सात किमी की दूरी पूरा करने में 48 दिन लग गए या आवेदन थाना पर दबा रहा। एफआईआर होने के करीब 15 दिन बाद 17 जून को पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज किया। 80 युवक-युवतियों के बयान किए दर्ज, अहियापुर पुलिस ने नेटवर्किंग कंपनी में प्रशिक्षण ले रहे 80 युवक-युवतियों का बयान दर्ज किया है। इसमें से कुछ ने शोषण और मारपीट की बात दोहरायी। युवकों ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की बात बतायी है। हालांकि, पुलिस इस संबंध में फिलहाल आधिकारिक जानकारी नहीं दे रही है। सोमवार को पुलिस कंपनी के बखरी स्थित कार्यालय गई थी। वहां दूसरी कंपनी का बोर्ड लगाकर प्रशिक्षण दिया जा रहा था। पुलिस हिरासत में लिए गए युवकों से गिरफ्तार तिलक के सामने पूछताछ कर सकती है।

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