रिपोर्ट- अभिषेक कुमार!
गया में गर्मी आते ही हाथ पंखे की मांग बढ़ जाती है,गया के मानपुर के पटवाटोली में पंखा गली के नाम से विख्यात है, मानपुर के इस पंखा गली में दर्जनों घर के लोग बना रहे हैं ताड़ के पत्तों और बांस से बने पंखा बिहार झारखंड सहित कई राज्यों में यहां से बने पंखे की मांग है।
दरअसल गर्मी का सीजन आते ही हाथ पंखे की मांग बढ़ जाती है यह हाथ वाली पंखे ताड़ के पत्तों से बनाए जाते हैं जिसकी मांग अभी सबसे ज्यादा है खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में और लोअर क्लास के लोगों में सबसे ज्यादा हाथ वाले पंखे की मांग रहती है । गया के मानपुर पटवा टोली में एक गली ऐसा भी है जिसे लोग पंखा गली के नाम से जानते हैं यहां हर घर में हाथ का पंखा बनाने में लोग जुटे हुए हैं हर घर के बाहर दलान पर घर के सदस्य महिला पुरुष पंखे को बनाते हुए देखा जा सकता है हालांकि यह पंखा की मांग आने वाले दिनों में वट सावित्री पूजा में भी इस पंखे की मांग काफी ज्यादा हो जाती है क्योंकि हर सुहागन महिलाएं इसी पंखे से अपने पति को पूजा करते हैं और पंखा से होकते हैं तो ऐसे में अभी से ही पंखा बनाने वाले छोटे कारीगर इसे बनाने में जुड़े हुए हैं महापुर पटवा टोली के पंखा गली में 200 सालों से यहां पंखा बनाने का काम किया जा रहा है कई पीढ़ियां इस काम को करते आ रही थी यहां से पंखे की थोक ऑर्डर भी दूसरे राज्यों में जाते हैं। हालांकि पंखा बनाने वाले लोग बताते हैं कि पहले 10 लाख पंखे बनाते थे अब वह घटकर महज दो से तीन लाख पंखे बनाने का काम होता है क्योंकि अब बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक और बैटरी से चलने वाले पंखे आ गए हैं लेकिन अभी ज्यादातर घरों में हाथ वाले पंखे का मांग रहती है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पंखे को बनाने के बाद उसमें आकर्षण देखने के लिए रंग-बिरंगे कलर भी लगाए जाते हैं कारीगर यह भी बताते हैं कि शहर में निर्वाध विद्युत आपूर्ति के चलते दशकों से लोगों ने हाथ पंखे को रखना भी लगभग कम कर दिया है, लेकिन जो लोग जानते हैं वह इस पंखे को भी अभी भी खरीदते हैं और संजो व सजा कर भी रखते हैं हाथ वाले पंखे को बनाने के लिए बांस और ताड़ के पत्तों से भी इसका निर्माण किया जाता है इस पंखे का मूल ₹5 से लेकर ₹20 तक है ।
बाईट—विनोद कुमार पंखा बनाने वाला कारीगर
बाईट—राजेश प्रसाद पंखा बनाने वाला कारीगर
रिपोर्ट — अभिषेक कुमार
गया




