:- रवि शंकर शर्मा !

सहरसा जिला के सदर थानाध्यक्ष राजमणि के खिलाफ मिली शिकायतों के बाद उनके अधिकारों में कटौती कर दी गई है। पुलिस निरीक्षक सह थानाध्यक्ष के पद पर रहे राजमणि अब बतौर इंस्पेक्टर थाने में गैर विशेष प्रतिनिधित्व कांडों का सुपरविजन नहीं करेंगे। इंस्पेक्टर अनिल सिंह को नॉन एसआर कांडों का सुपर विजन करने की जिम्मेवारी दी गई है। सदर थाना में दर्ज होने वाले छोटे मामलों तथा गैर विशेष प्रतिवेदित ( नॉन एसआर) या अविशेष प्रतिवेदित कांडों का पर्यवेक्षण अनिल सिंह द्वारा किया जाएगा। दरअसल कुछ दिनों पहले एक महिला अपने प्रेमी के साथ लाखों रुपए नगद और लाखों रुपए मूल्य के जेवर के साथ घर से भाग गई थी। उस मामले में राजमणि की भूमिका पर सवाल उठे थे तथा यह बात प्रकाश में आई थी कि प्रेम प्रसंग का मामला होने के बावजूद चोरी की धारा में प्राथमिकी दर्ज की गई ताकि इस केस का पर्यवेक्षण अधिकार अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर के पास न जाकर सदर थाना में उनके पास ही रह जाए। प्रेम प्रसंग में कोई लड़की अथवा महिला जब अपने प्रेमी के साथ जाती है तो नियमानुसार बहला फुसलाकर ले जाने अथवा अपहरण की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज होती है तथा वह एसआर कांड यानी विशेष प्रतिनिधित्व कांड माना जाता है। जानबूझकर उस कांड को चोरी के मामले में दर्ज किया गया। इतना ही नहीं उत्तराखंड के लश्कर में जब महिला और उसका प्रेमी लश्कर जीआरपी के द्वारा रूपयों और जेवरात के साथ पकड़ा गया तो लश्कर के न्यायालय में प्रस्तुत कर ट्रांजिट रिमांड पर लेने के बजाय सीधे उसे सहरसा लाया गया। सहरसा लाने के बाद भी इंस्पेक्टर राजमणि द्वारा कांड को तथ्य की भूल समर्पित कर केस को फाइनल कर दिया गया तथा बिना वरीय अधिकारियों के आदेश तथा सक्षम न्यायालय के आदेश के रूपयों तथा जेवर को जिम्मानामा पर परिवार को सौंप दिया गया जबकि इसके लिए न्यायालय का आदेश जरूरी है। चोरी की धारा में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद यदि रुपयों और जेवरात की बरामदगी होती है तो उसे न्यायालय में प्रस्तुत करना जरूरी होता है लेकिन उनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया। चोरी के आरोप में गिरफ्तार युवक को न्यायालय में प्रस्तुत कर महिला का बयान न्यायालय में दर्ज कराया जाना था तथा न्यायालय के आदेश के बाद ही पुलिस को कुछ करने का अधिकार था। राजमणि द्वारा न तो वरीय अधिकारियों को कुछ जानकारी दी गई और न ही न्यायालय से आदेश लिया गया। मामला प्रकाश में आने के बाद ही राजमणि से सुपरविजन का अधिकार लेकर इंस्पेक्टर अनिल सिंह को प्रभार दिया गया है तथा थाना में दर्ज होने वाले नॉनसर कांडों का पर्यवेक्षण अनिल सिंह के द्वारा किया जाएगा। वहीं सहरसा में आम लोगों के बीच चर्चा थी कि उस प्रेम प्रसंग के मामले में लाखों रुपए की हेराफेरी हुई है। इस मामले में सहरसा पुलिस अधीक्षक द्वारा राजमणि से स्पष्टीकरण पूछा गया था तथा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को कांड का दोबारा सुपरविजन कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।




