रिपोर्ट:-निभाष मोदी

भागलपुर की जिस खादी ने अपनी गुणवत्ता के बल पर देश विदेश मे पहचान बनाई आज उसी खादी उद्योग की कमर टूटती नजर आ रही है इसी को सुधार के लिए आज की यह बैठक रखी गई बैठक का मुख्य विषय था खादी ग्रामोद्योग को फिर से अपने मुकाम तक पहुंचाना इससे जितने भी लोग तालुकात रखते हैं उन्हें व्यवसायिक दृष्टि से रकम मुहैया कराना। एक तरफ जहां सरकार की लचर व्यवस्था को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है वही दूसरी तरफ वर्तमान सरकार ही इस पर विशेष ध्यान देने की बात कर रहे हैं। भागलपुर विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के रेकाबगंज में आज खादी ग्रामोद्योग को लेकर एक विशेष बैठक रखी गई इसमें सबों ने अपने-अपने व्यथा को सुनाई। मुख्य रूप से वैश्विक महामारी कोरोना में इस व्यवसाय से जुड़े लोग पूर्णरूपेण जर्जर स्थिति में आ गए हैं उन्हें खाने तक को लाले पड़ गए हैं।
बताते चलें 2010 तक प्रतिदिन 10 से 20 लाख की कपड़ों की बिक्री हुआ करती थी ,खादी में विशेष छूट मिलने पर 30 लाख तक आंकड़ा पहुंच जाता था। जिला खादी ग्रामोद्योग संघ कार्यालय में 13 वर्षों से संघ धागा कताई रंगाई छपाई व कपड़ा बुनाई लगभग बंद है । कई कर्मचारी बेरोजगार हो चुके हैं अब यहां से दूसरी खादी संस्थान की मदद से कपड़ा बेचा जा रहा है, खादी कारोबार काफी घाटे में चल रही है ,वहीं वैश्विक महामारी कोरोना ने और भी कमर तोड़ दिया।
विश्वविद्यालय तिलकामांझी भागलपुर थाना अंतर्गत रकाबगंज में आज की इस बैठक में मीडिया से बात करते हुए अशोक कुमार सिंह उप कार्यपालक पदाधिकारी बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग केंद्र ने कहा की खादी ग्राम उद्योग को वर्तमान सरकार विशेष ध्यान देने की बात कर रहे हैं उम्मीद है खादी ग्रामोद्योग की जो अभी स्थिति हो गई है खासकर वैश्विक महामारी को रोना में उस पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है इन से तालुकात रखने वाले जितने भी व्यवसाई हैं मजदूर वर्ग हैं उस पर विशेष ध्यान दिया जायगा।




