धन और समृद्धि के उत्सव का प्रतीक है धनतेरस!

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रिपोर्ट – संतोष तिवारी

मुजफ्फरपुर

धनतेरस” शब्द दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है, “धन” का अर्थ है धन और “तेरस” का अर्थ है तेरहवां दिन. धनतेरस धन और समृद्धि के उत्सव का प्रतीक है. यह वह दिन है जब लोग वित्तीय समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए आशीर्वाद मांगने के लिए देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं.
इस वर्ष धनतेरस के दिन पूजन का शुभ मुहूर्त-:-
कुंभ लग्न -:-01:16 से लेकर 2:45.
वृष लग्न-:- 05:52 से लेकर 7:48.
सिंह लग्न-:-12:20 से लेकर 02:34.
देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि। देवी लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी हैं. भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के देवता हैं और स्वास्थ्य & उपचार से जुड़े हैं. वित्तीय समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए धनतेरस पर उनका आशीर्वाद मांगते हैं.
धनतेरस पर प्यार और समृद्धि के संकेत के रूप में उपहारों का आदान-प्रदान करने की प्रथा है. इस दिन खरीदने में आभूषण, सोने या चांदी के सिक्के, तांबे & पीतल के बर्तन, नए गाड़ी दो चक्का & चार चक्का, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और घरेलू सामान शामिल हैं. धनतेरस न केवल भौतिकवादी उत्सवों का पर्व है, बल्कि आध्यात्मिक चिंतन, आभार व्यक्त करने और उज्ज्वल, समृद्ध भविष्य की कामना करने का भी अवसर है. धनतेरस के दिन सम संख्या में 2,4,6,8 में झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है. इस दिन गेहूं के आटे का हलवा, धनिया & गुड़ का चूर्ण {पंजीरी}, बूंदी का लड्डू लक्ष्मी और कुबेर & धन्वंतरि जी के पूजन में अर्पण करने से अचल लक्ष्मी और आरोग्यता की प्राप्ति होती है. धनतेरस के दिन औषधि के रूप में च्यवनप्राश &आयुर्वेदिक दवा खरीद कर धनवंतरी के पूजन के साथ औषधि का पूजन करने से उसका 13 गुना प्रभाव बढ़ जाता है और उस दवा के सेवन से रोग यथाशीघ्र ठीक होने लगता है. इस दिन श्रद्धा और भक्ति से लक्ष्मी & कुबेर और और भगवान धन्वंतरि का पूजन करने से भक्तों के जीवन में समस्त कामनाओं की पूर्ति होती है और अचल लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. धनतेरस आरोग्यता के साथ समृद्धि देने वाला व्रत है, इसे श्रद्धा और भक्ति से करने पर परिवार में सुख शांति अचल लक्ष्मी और आरोग्यता की प्राप्ति होती है.
आध्यात्मिक गुरु श्री कमलापति त्रिपाठी “”प्रमोद””

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