रवि शंकर अमित :-
मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने जनता दरबार की शुरुआत करते हुए कहा था की अधिकांश आपराधिक मामले भूमि या संपत्ती विवाद से जुड़े होते हैँ और इसमें सच्चाई भी है, इसी को लेकर ऐसे मामलों के निबटारे के लिये हर थाना में थानाध्यक्ष और सीओ को जनता दरबार लगाकर मामले का निष्पादन करने का आदेश सरकार ने निर्गत किया था!
मुख्यमंत्री ने तब ये भी निर्देश दिया था की
अगर मामले थाना और सीओ स्तर से नहीं सुलझते हैँ तो इसे एसडीएम और एसडीपीओ को देखना होगा और अगर एसडीएम तथा एसडीपीओ मामले को नहीं सुलझा पाते हैँ तो डीएम और एसपी देखेंगे!
अगर ये धरातल पर लागु हो पाता तो ना सिर्फ आपराधिक घटनाओं में कमी आती बल्कि अदालतों पर भी बढ़ते जा रहा मुकदमों का बोझ घटता,
लेकिन आज धरातल की सच्चाई साफ इससे अलग है!
जनता दरबार की जमीनी हकीकत की तलाश ज़ब हमारे संवाददाता रवि शंकर करने निकले तो अधिकांश ऐसे लोग मिले जो महिनों से नहीं बल्कि वर्षों से थाना और सीओ के चक्कर लगाते मिले!
सीओ और थानाध्यक्ष वरीय पदाधिकारियों को मामला भेजते भी नहीं हैँ और निष्पादन भी नहीं करते!
जमीनी विवाद में थाना यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है की मामला सीओ का है, और सीओ कहते हैँ कोर्ट चले जाएँ नतीजतन संगीन आपराधिक वारदातों में बेतहाशा वृद्धि होती जा रही है!
मुख्यमंत्री ने संगीन अपराधों को रोकने के लिए जिस जनता दरबार का आदेश जारी किया था वो पुलिस के हाथ खड़े करने से और अधिक बढ़ गया है!
और जनता दरबार अपना महत्व खोता चला जा रहा है!

बाइट :- 1 to 5 फरियादी
बाइट :- ज्ञानानंद,सीओ, मोकामा




