विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर किलकारी बाल केंद्र भभुआ में आयोजित किया कार्यक्रम

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कैमूर/भभुआ(ब्रजेश दुबे):

पर्यावरण प्रेमी शिवम कुमार के नेतृत्व में विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर किलकारी बाल केंद्र भभुआ में गौरैया संरक्षण के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और बच्चों ने कृत्रिम घौंसले, सुखी लकड़ी से पक्षी, मिट्टी से गौरैया व पक्षी बनाया उसके बाद घौंसला को पूरी तरह से बना कर कई विभिन्न पेड़-पौधों व जगहों पर रखा गया। शिवम ने बच्चों को बताया कि घर-आंगन में चहकने – फुदकने वाली छोटी-सी, प्यारी-सी चिड़िया गौरैया की चहचहाहट हम सभी के बचपन एवं जीवन का हिस्सा रही हैं। परंतु बाद में वह हमसे रूठ गई, क्योंकि हमने उसका ध्यान रखना छोड़ दिया था। भारत एक ऐसा देश है, जहां पर पक्षियों की बहुत सारी प्रजातियाँ पाई जाती है, जिनमें गौरैया का विशेष महत्व है। गौरैया को अक्सर आपने अपने घरों और पेड़ पौधों पर देखा होगा। लेकिन आज के समय में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और कीटनाशक पदार्थों के छिड़काव के कारण यह विलुप्त होने के कगार पर है। हम सब मिलकर यह संकल्प लेते हैं कि हम गौरैया के लिए प्राकृतिक परिवेश का निर्माण करेंगे और उनकी संख्या को बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इस नन्ही-प्यारी दोस्त गौरैया का ख्याल रखेंगे। बिहारी होने के नाते राजकीय पक्षी के प्रति यह हमारी जिम्मेदारी भी है। तो आइए मिलकर गौरैया मित्र बनें हम सब घौंसला बना कर पक्षीयों को रहने के लिए कई विभिन्न जगहों पर लगाया जा रहा है। यह दिवस संदेश है पक्षियों को बचाने का गौरैया के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उसके संरक्षण के लिए मनाया जाता है। बढ़ते प्रदूषण सहित कई कारणों से गौरैया की संख्या में काफी कमी आई है और इनके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

  • अपनी छत पर रखें दाना पानी
    शिवम ने बताया कि गौरैया संरक्षण के लिए हम यही कर सकते हैं कि अपनी छत पर दाना-पानी रखें, अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाएं, उनके लिए कृत्रिम घोंसलों का निर्माण करें। साथ ही दाना-पानी भी रखा जा रहा है।शिवम ने बताया कि गर्मी के दिनों में अक्सर हम सुनते हैं कि कई पक्षीयां मर जाती हैं। कई सालों से हम लोग सभी पर्यावरण में रहने वाले जीव-जंतुओं को बचाने के लिए कई विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। कई पक्षी विलुप्त होने के कागार पर है। समय रहते हुए अगर नहीं बचाएं तो इस प्यारी-सी गौरैया फोटो या गुगल में ही देखना पड़ सकता है। पर्यावरण संरक्षण करें क्योंकि पर्यावरण हैं तो हम सभी का जीवन धरती पर हैं नहीं तो जीवन संकट में पड़ सकता है।बेजुबान पक्षीयों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य धर्म हैं। पक्षियों को बचाने के लिए नई पीढ़ी को दाना और पानी डालने की परंपरा जीवित करना होगा। इस कार्यक्रम के दौरान समन्वयक धर्मेन्द्र कुमार प्रभाकर, शिक्षक व छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित रहें।

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