शोभा की वस्तु बना आयुष्मान भारत कार्ड, ईलाज के लिये ठोकरें खा रहा ये मजदूर!

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आकाश कुमार
पूर्णिया

एक तरफ सरकार आयुष्मान भारत योजना की सफलता के किस्से सुना रही है। विज्ञापन के पीछे पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। तो दूसरी तरफ ठीक इसके विपरित आयुष्मान भारत कार्ड जरूरतमंदों के लिए महज शोभा की वस्तु बनकर रह गया है। दरअसल कार्ड रहते हुए भी जिले में आयुष्मान भारत कार्डधारी मजदूर को इलाज के लिए दर-दर की ठोंकरे खानी पड़ रही है।
दरअसल 6 माह पूर्व मजदूर अवधेश सड़क हादसे का शिकार हो गया था. अवधेश की कमाई से ही घर का राशन चलता था. नौबत ऐसी है कि अब अवधेश के पिता और पत्नी घरखर्ची व इलाज के लिए भीख तक मांगने को मजबूर हैं।

पीडित मजदूर अवधेश और उनका परिवार जिले के के.नगर प्रखंड के मजरा गांव के रहने वाले हैं। फिलहाल अवधेश का इलाज किसी तरह पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में चल रहा है। सड़क हादसे में घायल हुए मजदूर के पास आयुष्मान भारत का कार्ड जरूर है, मगर यह कार्ड फिलहाल शोभा की वस्तु बनकर रह गई है. आयुष्मान का र्डरहते हुए भी इलाज के लिए दर- दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। घर के हालात इस कदर खराब हैं कि पिता और पत्नी इलाज के लिए भीख मांगने पर मजबूर हैं। फिलहाल अवधेश का इलाज पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में इलाज चल रहा है।

पीडित अवधेश पासवान ने बताया कि वह पेशे से राजमिस्त्री है। बताया जाता है कि 6 माह पूर्व एक साइट पर काम कर रहे दे थे, तभी पैर फिसलने से वह नीचे जमीन पर गिर गए। इस दुर्घटना में उनके स्पाइनल कोड की हड्डी टूट गई। जिसके बाद से वे पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हैं।

अवधेश की पत्नी खुशबू कुमारी ने बताया कि वह काफी गरीब परिवार से हैं। पति के एक्सीडेंट के बाद उन्हें IGIMS रेफर किया गया। हमारे पास आयुष्मान भारत का कार्ड भी है। लेकिन IGIMS प्रबंधन की ओर से आयुष्मान भारत के कार्ड से इलाज करने से साफ इंकार कर दिया गया। इसके बाद ससुर लक्ष्मण पासवान पूर्णिया पहुंचे और लोगों से भीख मांगे। गांव के ही कुमोद पासवान के सहयोग से चंदा उठाकर 2.50 हजार जमा किया गया और उसी से स्पाइनल में स्टील का रड लगाया गया। लेकिन नस सूखने की समस्या होने लगी। डॉक्टर ने नस का इलाज के लिए दोबारा से किसी बेहतर अस्पताल जाने की सलाह दी।

अवधेश के पिता लक्ष्मण पासवान ने बताया कि जब पटना में
नस रोग डॉक्टर से मिले तो उन्होंने 3 लाख रूपए खर्च होने की
बात कही। हालांकि घर की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी नहीं। इस कारणवश मरीज को फिर से पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गायक। यहां इलाज तो चल रहा है, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुई है। बेहतर इलाज के लिए जनप्रतिनिधियों तक से गुहार लगाई गई लेकिन किसी ने भी मदद नहीं की। बेटे के इलाज के लिए भीख मांगना पड रहा है।

बाइट1 मजदूर, अवधेश

बाइट2 -पिता, लक्ष्मण पासवान

बाइट3 -पत्नी ,खुशबू कुमारी

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