ब्राह्मण कोर वोटर ठाकुर और भूमिहार से सियासत?

SHARE:

सियासत मेरी कलम से पंकज कुमार ठाकुर

आखिर पंडितों के खिलाफ क्यों गए मोहन भागवत वेद पुराण सभी में जाति व्यवस्था का जिक्र है! रामायण में केवट का जिक्र वेदों में जाति व्यवस्था की बात तथा मनु स्मृति में चार वर्ण कहां से आए बताएंगे मोहन भागवत साहब हिंदू मुसलमान का खेल या मंडल कमंडल की राजनीति आप से बेहतर कौन बता सकता है! ब्राह्मणों से वोट ठाकुर और भूमि हारों से सियासत आप से बेहतर कौन बता सकता है! तो ब्राह्मण ही निशाने पर क्यों अब जरा मामले को समझें 15 से 18 करोड ब्राह्मण वोटर हैं और यह भारतीय जनता पार्टी के कोर वोटर है! जो थोड़े नाराज भी हो जाएंगे तो काम चल जाएगा लेकिन बिहार की आबोहवा को देखते हुए पिछली बार जो उन्होंने चुनाव के समय गलती किया था आरक्षण को लेकर दिए बयान लेकिन इस बार उसी बयान को पलट कर ब्राह्मणों पर खेल दिया गया! जिससे भाजपा के वोट बैंक और मजबूत हो दलितों के द्वारा लेकिन ठीक इसके विपरीत अभी योगी आदित्यनाथ का सीधे लफ्जों में जवाब आया कि विकास की राजनीति करता है उत्तर प्रदेश यानी साफ-साफ मोहन भागवत के बयान को योगी आदित्यनाथ दरकिनार कर रहे हैं जबकि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास को लेकर आगे बढ़ने को मूल मंत्र मानते हैं ऐसे में मोहन भागवत ने अपनी किरकिरी होते देख तुरंत एक बयान जारी करवाया r.s.s. से पंडितों का मतलब विद्वान था! बरहाल राजनीति खेमे में भूचाल मचा हुआ है तो कोई भाजपाई मुंह खोलने को गुरेज कर रहे हैं और बच बच कर बयान दे रहे हैं! तो विपक्ष गोलबंद हो रहे हैं। जिसे तोड़ने को लेकर भी इस बयान के कई मायने लगाए जा रहे हैं। बरहाल कई राजनीतिक विश्लेषक यह भी बताते हैं कि। बयाना बाजी तो दरअसल एक बहाना है। आने वाले 24 निशाना है।

Join us on:

Leave a Comment