रिपोर्ट अनमोल कुमार
धनबाद : प्राइवेट हॉस्पिटल में आग लगने से डॉक्टर दंपति सहित पांच लोगों की मौत के मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने गहरा दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई।
राज्य सरकार ने हादसे के कारणों पर जिले के उपायुक्त से रिपोर्ट मांगी है और हादसे में घायल हुए लोगों के इलाज की बेहतर व्यवस्था का निर्देश दिया है।
सभी मृतक हाजरा परिवार के हैं।हादसे में हाजरा क्लिनिक एंड हॉस्पिटल के संचालक डॉ. विकास हाजरा और उनकी पत्नी डॉ. प्रेमा हाजरा, डॉक्टर विकास का भांजा सोहेल खमारू, खाना बनाने वाली तारा और डॉ. विकास के घर आए शंभु सिंधो नामक मेहमान शामिल हैं। शुरुआत में हादसे में छह लोगों की मौत की बात कही गई थी, लेकिन जिला प्रशासन ने पांच लोगों के मरने की पुष्टि की है।
शॉर्ट सर्किट से लगी थी आग

जिला प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू करा दी है। हॉस्पिटल के प्रबंधक के मुताबिक आग शॉर्ट सर्किट से लगी। 250 बेड वाले हॉस्पिटल में भर्ती सभी मरीजों को सकुशल निकाल लिया गया। हादसे के वक्त यहां 17 मरीज और उनके परिजन थे। ये सभी हॉस्पिटल के नीचे की मंजिल पर थे। रात लगभग डेढ़ बजे लगी आग दूसरी मंजिल से शुरू हुई थी, जो पहले स्टोर रूम और उसके बाद पूरे हॉस्पिटल में फैल गई थी। नीचे की मंजिल के लोगों को यहां आग फैलने से पहले ही निकाल लिया गया। हॉस्पिटल के गार्ड ने इमारत की दूसरी मंजिल पर लगी आग को पहले खुद से बुझाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। फायर ब्रिगेड की छह गाड़ियां रात लगभघ पौने तीन बजे मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया।
बचाने की गुहार लगाते रहे डॉ हाजरा, समय पर नहीं नहीं मिली मदद
हॉस्पिटल के संचालक डॉ. विकास और उनका पूरा परिवार इमारत की दूसरी और तीसरी मंजिल पर रहता था। हादसे के वक्त सभी लोग सो रहे थे। डॉ. विकास को जब आग फैलने का अहसास हुआ, तो उन्होंने बाथरूम में जाकर जान बचाने की कोशिश की। एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह बाथरूम की खिड़की से बचाओ-बचाओ का शोर लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सभी लोगों की मौत धुएं से दम घुटने की वजह से हुई। डॉ. विकास खुद को बचाने के लिए बाथरूम के बाथ टब में बैठ गए थे। उन्हें जब बाहर निकाला गया तो उनकी सांसें चल रही थीं, लेकिन मेडिकल कॉलेज ह़ॉस्पिटल ले जाने के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इसी परिवार के डॉक्टर समीर हाजरा जिस कमरे में सो रहे थे, वहां तक धुआं नहीं पहुंचा। उनकी जान बच गई ।
धनबाद में हाजरा परिवार की है प्रतिष्ठा
धनबाद के बैंक मोड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत टेलीफोन एक्सचेंज रोड पर हाजरा क्लिनिक एंड हॉस्पिटल की स्थापना डॉ. विकास के पिता डॉ. सीसी हाजरा ने 60 के दशक में की थी। 10 बेड से शुरू हुआ यह हॉस्पिटल अब 250 बेड का है। डॉ. हाजरा के परिवार की पूरे कोयलांचल में ख्याति रही है। डॉ. हाजरा ने वर्ष 2005 में रांची से सेवेन डेज नामक एक साप्ताहिक अखबार का प्रकाशन भी शुरू किया था। लेखन और पठन-पाठन में उनकी गहरी रुचि थी। सामाजिक कार्यों में भी उनकी सक्रियता थी। इस हादसे से पूरे कोयलांचल में शोक की लहर है।
धनबाद 60 के दशक में आये थे चंडीचरण हाजरा
धनबाद के गुजराती व्यवसायियों ने चंडीचरण हाजरा (सीसी हाजरा) को पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिला से धनबाद बुलाया था। यहां आने के बाद उन्होंने सबसे पहले श्री श्री लक्ष्मी नारायण ट्रस्ट द्वारा संचालित अस्पतालों में सेवा शुरू की।
वर्ष 1978 में डॉक्टर सीसी हाजरा इस ट्रस्ट एवं अस्पताल के अधीक्षक बने. स्त्री रोग विशेषज्ञ के रुप मे धनबाद में बड़ी पहचान बनाई। इसके बाद सीसी हाजरा ने पिता आरसी हाजरा के नाम पर हाजरा मेमोरियल हॉस्पिटल खोला।
वर्ष 2014 में सीसी हाजरा का निधन हो गया। उनके बाद उनके बेटों ने पुराना बाजार स्थित टेलीफोन एक्सचेंज रोड में सीसी हाजरा के नाम से अस्पताल का विस्तार किया। पहले एक बिल्डिंग हुआ करती था. बेटों ने दो नए बिल्डिंग बनाए। एक बिल्डिंग में डॉक्टर समीर तो दूसरी बिल्डिंग में डॉक्टर विकास मरीजों को देखते थे। घर में बंगाली रीति रिवाज का पालन होता है।
इसी बिल्डिंग में विकास और समीर की बहन डा रीता हाजरा भी प्रैक्टिस करती हैं। रीता ने शादी नहीं की है। बाद में डा विकास हाजरा की पत्नी डा प्रेमा हाजरा भी प्रैक्टिस करने लगी। परिवार के सभी सदस्य महिला रोग विशेषज्ञ हैं। बांझपन का भी इलाज सभी करते हैं। अस्पताल में धनबाद के अलावा दूसरे जिलों के भी दूरदराज के मरीज प्रसव के लिए आते हैं।
डाक्टर दंपत्ति का एक बेटा व एक बेटी है। पुत्र आयुष पांडिचेरी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है, जबकि पुत्री प्रेरणा की पढ़ाई नेपाल में हो रही है। दोनों को माता पिता की मौत की सूचना दे दी गई है। साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों को भी घटना से अवगत करा दिया गया है. दोनों बच्चे सरस्वती पूजा में धनबाद आने वाले थे। लेकिन काम का प्रेशर अधिक होने के चलते नहीं आ सके। हर साल सरस्वती पूजा के मौके पर हाजरा का पूरा परिवार यहां जुटता है. शहर के कई गणमान्य लोगों का भी यह जुटान होता है. शाम पांच बजे तक शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई थी।
डाक्टर सीसी हाजरा के करीबियों ने बताया कि दोनों भाइयों के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था। दोनों के बीच प्रॉपर्टी का विवाद था. एक ही छत के नीचे रहने के बाद भी बातचीत नहीं के बराबर होती थी। विकास की बातचीत सिर्फ बहन से होती है। छोटे भाई समीर की बहन से बहुत कम बात चीत होती थी. एक ही बिल्डिंग तीनों भाई बहन रहते हैं। पारिवारिक विवाद के बाद भी सभी मिलकर अस्पताल का संचालन कर रहे थे। दोनों के लिए अलग-अलग चेंबर, गोदाम और अलग-अलग मरीजों के भर्ती होने की जगह थी। इसी फ्लोर में डाक्टर विकास और उनकी पत्नी रहती थी, जहां आग लगने की घटना हुई।
आग से बचाव में जुटे अमर नाथ व बंटी ने बताया कि स्थिति इतनी खतरनाक थी कि अंदर जाना मुश्किल हो रहा था। किसी तरह हेलमेट के सहारे रूम में घुसे. अंदर लकड़ी का काम होने के कारण आग काफी तेजी से फैल रही थी। डॉ विकास हाजरा बाथरूम में थे। दरवाजा तोड़ कर उन्हें निकाला गया। वह बाथटब में थे. डा. प्रेमा हाजरा बेड के नीचे थी। सभी को स्ट्रेचर से किसी तरह बाहर लाया गया. उन्हें पहले पाटलीपुत्र मेडिकल अस्पताल ले जाया गया, जहांड़ाक्टरों ने पांच लोगों को मृत घोषित कर दिया। उसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिय एसएनएमएमसीएच अस्पताल ले जाया गया।
घर के किचन में भी आग पहुंच गई थी. वहां गैस का नब खुला था। पाइप में लगी आग सिलेंडर में पकड़ गई। इसके बाद आग ने और भयंकर रूप ले लिया. जब तक कुछ समझ में आता, आग पूरे घर में फैल चुकी थी। देखते ही देखते पांच लोगों की मौत इसमें हो गई। आग धीरे-धीरे स्व. डा. हाजरा के पूरे आवास में फैल गई। लोग दौड़कर जाकर उन्हें बचाते, तब तक स्थिति बिगड़ चुकी थी। कुछ भी करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। गैस व आग के कारण सभी बेबस थे।
आग की चपेट में आने से घायल स्व. डाक्टर हाजरा के गांव का रहने वाला सुनील मंडल हर साल सरस्वती पूजा के मौके पर मछली ले कर आता था। इस बार भी मछली लेकर आया था. उसे दूसरे दिन लौट जाना था, लेकिन डाक्टर ने उसे रोक लिया। घटना में वह भी गंभीर रूप से जख्मी हो गया। उसका इलाज पाटलीपुत्र नर्सिंग होम में चल रहा है। स्थिति गंभीर बनी हुई है।




