फिर निपटने को इस महामारी से तैयार हम क्या थे?मरीजों का निकल रहा है दम ऑक्सीजन क्यों कम!

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कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर!

सरकारी सिस्टम को इन्फेक्शन, तो ऑक्सीजन कहां से!

सांसो पर ग्रहण इस बदहाली का जिम्मेवार कौन!

मंथन

कोरोना कोरोना कोरोना यह कोई नया नाम नहीं है लोगों के लिए 1 साल से लोग इस अदृश्य मौत के डर से जी रहे हैं। और यह अदृश्य मौत हमारे बीच एका एक नहीं भयानक हो गई,अचानक नहीं तू सवाल लाजमी है इस 1 साल में हमने तैयारी क्या किया। मामले पूरे देश में 300000 के पार पहुंच चुका है जो राज्य भी अछूता नहीं बच पा रहा है।
बेबसी के आंसू आंसू नहीं ऐसा सरकता लहू है जो दिल को चीर कर जिसमें तड़प नस्तर चुभो कर बह पढ़ती है। देश के अलावा कई ऐसे राज्य से भी तस्वीरें आई जो सिस्टम को कभी माफ नहीं किया जा सकता । ऑक्सीजन हो दवाई हो बेड हो हमेशा कमी की खबर आ रही। मरीजों का दम निकल रहा है तो ऑक्सीजन नहीं मिल रहा है। कई राज्यों में लोगों के सांसो पर ग्रहण लग गया है। तो पूरा सरकारी सिस्टम को इंफेक्शन हो गया है। अब ऐसे में उन बाबुओं से पूछे कि आखिर उनकी तैयारी क्या थी। जिनके कंधों पर यह भार दिया गया था।
अब ऐसे में स्थिति साफ है कि कहीं ना कहीं यह नकारे पन का नतीजा प्रतीत होने लगा है।

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