प्रस्तुति – अनमोल कुमार
कौन हैं देवर्षि नारद?
ब्रह्मा के मानस पुत्र। हाथ में वीणा, मुख पर “नारायण-नारायण”। तीनों लोकों – स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल – में बिना पासपोर्ट-वीजा के घूमने वाले एकमात्र ऋषि।
काम: सूचना लाना, सूचना ले जाना। देवता से असुर तक, राजा से रंक तक – सबके बीच संवाद कराना।
क्या नारद “ब्रह्मण्ड के प्रथम पत्रकार” हैं? :
हाँ, प्रतीकात्मक रूप से बिल्कुल हैं।
पत्रकार के 5 धर्म नारद जी में था? कैसे ?
सूचना संग्रह: हाँ इंद्रलोक की खबर पृथ्वी पर, पृथ्वी की खबर वैकुंठ में।
सूचना प्रसार: हाँ कंस को बताया “8वां बेटा मारेगा”। यही “ब्रेकिंग न्यूज” थी।
जन-जागरण : हाँ भक्त प्रह्लाद, ध्रुव, वाल्मीकि को रास्ता दिखाया। “एडिटोरियल” लिखा।
निर्भीकता ; हाँ विष्णु को भी टोक देते, रावण को भी ज्ञान दे आते। किसी से डर नहीं।
निष्पक्षता ; विवादित खबर देते थे पर “नारायण” का एजेंडा चलाते थे। कभी-कभी झगड़ा भी लगाते थे – “नारद मुनि, झगड़ा करावन”।
इसलिए : नारद जी “सूचना-वाहक, संवाद-सेतु, लोक-शिक्षक” थे।
इसीलिए पत्रकार संगठन 2 मई को नारद जयंती को “पत्रकारिता दिवस” मनाते हैं। 2016 से विश्व संवाद केंद्र ये परंपरा चला रहा है।
वर्तमान में फर्क : आज का पत्रकार खबर छापकर रुक जाता है। नारद जी खबर देकर “घटनाक्रम” भी बदल देते थे। वो रिपोर्टर + एक्टिविस्ट दोनों थे।
“कलह” नहीं “कल्याण” : “नारद मुनि झगड़ा लगावने ” वाला टैग गलत है। वो झगड़ा “अधर्म vs धर्म” के बीच लगाते थे। TRP के लिए हिंदू-मुस्लिम मत लड़ाओ।
विनोबा का जोड़: विनोबा कहते – “नारद जी पहले ‘भूदान-आंदोलनकारी’ थे। वो विचार लेकर घूमते थे, जमीन नहीं मांगते थे।” पत्रकार का काम भी विचार-दान है।
“सूचना शस्त्र है। इसके दो मुंह हैं – एक से अमृत निकले, एक से विष। चुनना तुम्हें है कि पत्रकार बनना है या अफवाहकार।”



