थर्मल से निकलने वाला राख, बना जानलेवा, जमींने हो रही बंजर, रोगों का तेज प्रसार, जाँच को आई टीम!

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संतोष तिवारी की रिपोर्ट –

मुजफ्फरपुर

स्क्रीन पर चल रही वीडियो को देखकर और सुनकर शायद आप समझ गए होंगे कि आखिर मसला क्या है? दरअसल थर्मल नगरी के नाम से मशहूर अपना कांटी जहां की बुनियादी समस्याए तो अनेक है। हालांकि उन बुनियादी समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या छाई का धूलकण जो वर्तमान की एक गंभीर समस्या बनी हुई है। छाई के धूलकण के कारण कांटी के दर्जनों गांव के हजारों की आबादी पर स्वास्थ्य संबंधित खतरा बढ़ गया है, इससे अस्थमा, संक्रमण, आंखों की रौशनी जाना इनमें एक है। तो दूसरी ओर इस छाई के कारण क्षेत्र के किसानों में बड़ी नाराज़गी बढ़ती जा रही है। छाई के कारण खेतिहर जमीन बंजर हो गई, पान की खेती का नामोनिशान मिट चुका है, आम लीची पपीता की फसल विलुप्त होते जा रहा है। कांटी के नारसंडा में एनटीपीसी कांटी द्वारा बनाए गए छाई के भंडारण स्थल जिसे ऐशडेक कहते है, वहां छाई की अवैध कटाई से नारसंडा, समरसपुर, पकड़ी, कोठियां, मधुबन इन गांव करीब 20 हजार आबादी पर संकट मंडरा रहा है, कृषि योग्य भूमि बंजर हो चुकी है। छाई के कारण पर्यावरण को कई वर्षों से नुकसान पहुँच रहा है। इन ससम्याओ के निजात के लिए एनटीपीसी के पास शायद कोई उपाय नही है, या यूं कहें कि इस समस्या को जानबूझकर एनटीपीसी बना रखा है। स्थानीय लोगो द्वारा छाई की समस्या से निजात मिल सके इसके लिए ओमप्रकाश चौरसिया और कई ग्रामीणों के अथक प्रयास के बाद कांटी के आसपास होने वाले प्रदूषण की जांच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने जांच दल का गठन कर आज सोमवार को जांच टीम स्थल का जांच करने पहुँची। ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष छाई से होने वाली समस्याओं को को बताया। स्थल जांच के बाद मुज़फ़्फ़रपुर आपदा प्रबंधन के अपर समाहर्ता राजीव कुमार ने बताया कि छाई के कारण वाकई में लोगो को काफी परेशानियां होती दिख रही है। उन्होंने लोगो को आश्वस्त किया कि हर हाल में इस समस्या से लोगो को निजात मिलेगा। वही एनटीपीसी से आए अधिकारी ने जांच टीम को बताया कि लैगून 01 जहां छाई का भंडारण होता है वहां से छाई ढुलाई बंद किया जा चुका है, हालांकि ग्रामीणों ने कहा कि हर रोज रात के समय में यहां से छाई की ढुलाई होती है। एनटीपीसी के अधिकारी ने कहा कि लैगून 01 में चारदीवारी की जाएगी जिससे लोगो की समस्याएं दूर हो जाएगा। आप खुद सुनिए स्थानीय ग्रामीण और जांच करने आए अधिकारी ने क्या कहा है। हालांकि ग्रामीणों के अनुसार बताया गया कि इससे पहले भी जांच टीम यहां पहुँची थी लेकिन नतीजा कुछ नही निकला, फिर से जांच दल के टीम पहुँचे है उम्मीद जगी है, लेकिन देखना होगा इस समस्या से लोगो को राहत कब तक मिल पाता है। जांच दल में आपदा विभाग अपर समाहर्ता के अलावा, कृषि अभियंता सहायक निदेशक शशि शेखर, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के वैज्ञानिक ललनी मोहन सिंह, कांटी सीओ राजशेखर, CI सुरेंद्र पासवान, कांटी प्रखंड कृषि पदाधिकारी विनय कुमार, ग्रामीण ओमप्रकाश चौरसिया, दिनेश चौरसिया, राजेश्वर प्रसाद चौरसिया, आनंद कुमार, कारी साहू सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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