अब आपदा से मिलने वाली राशि पर बिचौलिए की नजर, जितनी मोटी रकम ,उतना चढ़ावा !

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कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर!

हम बोलेगा तो कहेगा कि बोलता है!

कहते हैं देश की राजनीति और सियासत तब तक पूर्ण नहीं हो सकती है जब तक किसानों का जिक्र ना हो, चाहे किसान कितने हाशिए पर हो लेकिन फाइल पूरी तरह कंप्लीट खुशहाल का।और अब इसी किसानों के नाम पर आपदा का खेला होवे शुरू, दरअसल इस बार किसानों को प्रकृति की मार झेलना पड़ा तो नदी नाले कई अधिकारियों के नकारेपन के कारण साफ सफाई नहीं की गई थी तो पानी की व्यवस्था ही खेत तक नहीं पहुंच पाई। आधे से अधिक किसानों की दिल टीस देकर रह गई। और अंततः वह खेती नहीं कर पाए, लिहाजा 2 माह बाद सरकार ने आपदा के रूप में 3500 देने का ऐलान किया । कृषि विभाग के किसान सलाहकार अलर्ट मोड में आ गए हर गांव में पांच बिचौलिए को कागज समेटने का काम दिया गया। आधार कार्ड बैंक पासबुक और किसान रजिस्ट्रेशन दलालों के मार्फत किसान सलाहकार के पास पहुंच रहे हैं कहीं आधी आधी पर तो कहीं ₹1000 एडवांस लेकर, दरअसल अब मामले को समझें सबसे पहले यह किसान सलाहकार के पास पहुंचेगा जहां वह वेरीफिकेशन के नाम पर हजार रुपया तो आधा आधी के नाम पर खेला होवे शुरू कर चुके हैं। अब ऐसे में कई गरीब किसान भी हैं जिन्हें ना ही सरकारी योजनाओं के बारे में कुछ पता, ना ही प्रतिनिधि चाहे वह मुखिया रहे पंचायत समिति या सरपंच खासकर हर पंचायत में प्रतिनिधियों द्वारा मौन धारण किए हुए हैं। जिस कारण बिचौलिए बड़े आराम से कुछ अधिकारी और प्रतिनिधि की मिलीभगत से गांव गांव पहुंचकर सुबह से कागज वसूली करण का काम शुरू हो जाता है। आप जितना तगड़ा मामूल देंगे, आपके खाते में उतना पैसा भेज दिया जाएगा। इस संदर्भ में जब कई बड़े अधिकारियों को फोन लगाया गया साहब ने बड़े आराम से जवाब दिया अभी तक संज्ञान में ऐसी कोई मामला नहीं है। तो जागे साहब मामले को संज्ञान में लीजिए क्योंकि जनता के टैक्स से आपको पैसे दे दिया जाता है। जहां जनता को एक रुपए की शैंपू खरीदने में भी टैक्स आखिर सरकार को हम क्यों ? अब ऐसे में कहना लाजमी होगा हर शाख पर उल्लू बैठा अंजामे गुलिस्तां क्या होगा।

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