जन सुराज की सोच को लेकर भागलपुर पहुंचे प्रशांत किशोर!

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धीरज शर्मा की रिपोर्ट:-

प्रशांत किशोर जन सुराज की सोच को लेकर बिहार के अलग अलग जिलों में जा रहे हैं। इसी क्रम में आज वे भागलपुर पहुंचे भागलपुर में उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, युवाओं, महिलाओं और समाज के अन्य प्रबुद्ध लोगों के साथ जन सुराज की सोच पर संवाद किया और 2 अक्तूबर से शुरू हो रहे पदयात्रा के बारे में विस्तार से बताया।

जन सुराज का अगर कोई दल बनेगा तो, वो बिहार के सभी सही लोगों का दल होगा

भागलपुर के एक स्थानीय होटल में प्रशांत किशोर ने पत्रकारों के साथ संवाद किया। प्रशांत किशोर ने जन सुराज के विचार को रेखांकित करते हुए बताया कि जन सुराज के माध्यम से वह लोगों के साथ संवाद स्थापित करना चाहते हैं। प्रशांत किशोर ने कहा, “उद्देश्य है बिहार में एक नई राजनीतिक व्यवस्था बनाना। सत्ता परिवर्तन हमारा मकसद नहीं है। अगर पदयात्रा के बाद सब लोगों की सहमति से कोई दल बनता भी है तो वो बिहार के सभी सही लोगों का दल होगा, प्रशांत किशोर का दल नहीं होगा। सब मिलकर अगर तय करेंगे तो दल बनाया जाएगा। अगर दल बनता है तो प्रशांत किशोर उसके नेता नहीं होंगे। मैं अभी लोगों से बात करने, उनकी समस्याओं को समझने में अपना पूरा वक्त लगा रहा हूं।”

जन सुराज कोई संगठन नहीं है, एक सोच है हम लोगों से संवाद करने आ रहे हैं, उनसे जुड़ने आ रहे हैं

प्रशांत किशोर ने कहा की वह 2 अक्तूबर से पाश्चिम चंपारण के गांधी आश्रम से पदयात्रा शुरू करेंगे। इस पदयात्रा के माध्यम से वो बिहार के हर गली-गांव, शहर-कस्बों के लोगों से मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे। उनसे समझेंगे कि कैसे बिहार को बेहतर बनाया जा सकता है। पदयात्रा में जब तक पूरा बिहार पैदल न चल लें तब तक वापस पटना नहीं जाएंगे, समाज में रहेंगे, समाज को समझने का प्रयास करेंगे। इसका एक ही मकसद है कि समाज को मथ कर सही लोगों को एक साथ एक मंच पर लाना। प्रशांत किशोर ने कहा कि पदयात्रा के बाद विकास के 10 सूचकांकों लिए विस्तृत ब्लूप्रिंट जारी करेंगे और सभी समस्यायों का समाधान भी बताएंगे।

पमुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान पर जोरदार पलटवार, कहा – उनके पास ‘ए’ से लेकर ‘जेड’ तक ज्ञान

प्रशांत किशोर ने भागलपुर में नीतीश कुमार द्वारा उनपर किए गए टिप्पणी का जवाब दिया है। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार जी यहां के बुजुर्ग नेता हैं, वो कुछ बोलना चाहते हैं तो उनको बोलने दीजिए। व्यक्तिगत टीका टिप्पणी करना ठीक नहीं है। अगर उन्होंने कुछ कहा है तो वो उनकी सोच है। कौन बीजेपी के साथ काम कर रहा है, जहां तक मैं और आपलोग जानते हैं अभी 1 महीना पहले तक नीतीश जी बीजेपी के साथ ही थे। नीतीश कुमार अगर किसी को इस तरह का सर्टिफिकेट दे रहे हैं तो ये हास्यास्पद है।”

नीतीश कुमार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, “17 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद आपको याद आया कि 10 लाख नौकरी दी जा सकती है, पहले ही दे देना चाहिए था। लेकिन चलिए अब नीतीश कुमार इतने बड़े नेता हैं, उनको A से Z तक पता है। दूसरे को ABC नहीं आता है। उन्होंने कहा है कि 10 लाख नौकरी देंगे, अगर दे देंगे तो हम जैसे लोगों को अभियान चलाने की क्या जरूरत है। अगर 10 लाख नौकरी दे देते हैं तो उनको नेता मानकर जैसे 2015 में उनका काम कर रहे थे, फिर से उनका काम करेंगे। उनका झंडा लेकर घूमेंगे। 10 लाख लोगों को नौकरी दे कर दिखाइए साल भर में। 12 महीना में 1 महीना हो गया है। 12 महीना के बाद उनसे पूछेंगे कि किसको ABC का ज्ञान है और किसको XYZ का ज्ञान है। अगर 10 लाख नौकरी दे दिए तो मान लेंगे कि सर्वव्यापी और सर्वज्ञानी आप ही है। एक भगवान ऊपर हैं और एक नीचे आप हैं।”

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