मनरेगा योजना, हरि अनंत हरि कथा अनंता।

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शंखनाद टीम बांका :-

गुणवत्ता तो छोड़िए, प्लॉट पर 10 मजदूर हाजिरी 25 की, धरातल पर उतर कर जांच की जाए तो खुल सकती है पोल!

मजदूरों को 100 दिन के काम देने के नाम पर मनरेगा योजना प्रतिनिधि और अधिकारियों के लिए कोई वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। दरअसल आप इसे टटोलना अगर शुरू करेंगे तो परत दर परत खुद सच्चाई खुलकर सामने आने लगेगा। इस योजना के नाम पर सबसे पहले प्रतिनिधि ऐसे लोगों को ढूंढ कर जॉब कार्ड बनवाते हैं। जिनके खाते में पैसे जाए और वह महज 25 परसेंट पर पैसे निकालकर बिचौलिए इन खाताधारक को दे देते हैं। खाताधारक भी खुश बिन बैठे-बिठाए मलाई अब ऐसे में सही मजदूरों तक नहीं पहुंच रहा है उनका हक। सभी पैसा गंतव्य स्थान तक पहुंचाया जा रहा है। गुणवत्ता की तो बात ही आप छोड़ दें हुजूर ईटों की अगर आप गुणवत्ता देख ले तो शायद आपके पांव तले की जमीन खिसक जाए। खुदाई के अलावा पुलिया का जो काम चल रहा है । इसे इस अनुरूप बनाया जा रहा है कि अगले बार में यह आ जाए।ऐसे में कई पुल पुलिया में भी बिना मानक रूप धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। दरअसल नाम न छापने की शर्त पर कुछ मनरेगा कर्मी बताते हैं कि विकास कहां से होगा हुजूर। सौ परसेंट पैसा जहां छोड़ कर आता है। वह पैसे 40 परसेंट बटवारा के तौर पर ही खत्म हो जाता है। अब ऐसे में कई ऐसे पंचायत है। जहां आज भी बिना मानक के अनुसार ईट और सीमेंट धड़ल्ले से ठोका जा रहा है। बड़े
अधिकारियों को इसे देखने की फुर्सत कहां, जहां बड़े बड़े नाले और दाढ के नाम पर खुदाई की गई है। खर्च करोड़ों का लेकिन किसानों के खेत तक फिर भी पानी नहीं पहुंच पाया। यह जनता है हुजूर सब जानती है। अब ऐसे में लाजमी है। मुखिया पर तो सवाल उठेंगे?

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