प्रकृृति का नैसर्गिंक उपहार है ककोलत जलप्रपात !

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नवादा से अनिल शर्मा की रिपोर्ट

तमाम बुनियादी सुविधाएं जैसे सौचालय महिलाओ को कपड़ा बदलने की घोर अभाव भी लोगो को आकर्षित करती है ककोलत।

प्रकृृति का नैसर्गिंक उपहार है ककोलत जलप्रपातककोलत जलप्रपात को बिहार का कश्मीर कहा जाता है। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण लोगों की आवाजाही बंद थी। दो साल बाद प्रतिबंध खत्म होने के कारण बड़ी तादाद में सैलानी जलप्रपात का लुत्फ उठा रहे हैं। प्रस्तुत है
ये ककोलत जलप्रपात नवादा जिले के गोविंदपुर पहाड़ियों में अवस्थित है। करीब 150 फीट की उंचाई से जलधारा गिरती है। ऐसे में स्नान करनेवाले लोगों को यह जलप्रपात खूब रोमांचित करता है। जब 45 डिग्री से भी अधिक तापमान बढ़ जाता है तब भी ककोलत के समीप शीतलता की अनुभूति कराता है। सैलानियों का कहना है कि ककोलत का झरना अदभूत और रोमांचित करनेवाला है।क्या बुजुर्ग जवान अपने को यह आने से रोक नही पाते है।
वैसे तो, कमोबेश सालोंभर लोग ककोलत आते हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण सैलानियों की आवाजाही पर प्रतिबंध था। इस दफा प्रतिबंध हटने से सैलानियों के अलावा स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों में खुशी देखी जा रही है।दुकानदार कहते है की प्रत्येक दिन 500 से 600 रुपया कमा लेते है।
ककोलत का ऐतिहासिक औरधार्मिक महत्व रहा है। ककोलत को कोल जनजाति का निवास स्थल माना जाता है। आस्था है कि महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां भी समय बिताया था। आस्था है कि यहाा पर स्नान करने से सर्पयोनि से मुक्ति मिल जाती है। ककोलत के केयर टेकर यमुना पासवान बताते हैं कि इस दफा गरमी शुरू होने के बाद से सैलानी आने लगे हैं।यमुना पासवान का मानना है की यह स्थान सिर्फ झरना का आनंद ही नही देता बल्कि यह का जंगल अनेक रोगों के इलाज की जड़ी बूटियों से भरा पड़ा है।यह आयुर्वेद का रिसर्च सेंटर स्थापित कर स्वस्थ भारत का निर्माण किया जा सकता है।यमुना पासवान बुनियादी सुविधा को पूरा करने की मांग करता है।
बाइट- यमुना पासवान, केयर टेकर, ककोलत जलप्रपात। प्रकृृति का अजीब संयोग है। एक तरफ नवादा और आसपास के लोग पाकिस्तान के जैकाबावाद जैसी गर्मी से जूझते हैं तो दूसरी तरफ यहां ककोलत जैसा शीतल झरना भी है, जिसकी शीतलता से तन और मन को सुकून मिलता है।।

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