धीरज शर्मा की रिपोर्ट
शरण राष्ट्र मानवाधिकार एवं अपराध विरोधी संगठन के प्रधान कार्यालय भागलपुर में वरिष्ठ वृद्ध महिला उम्र लगभग 66 वर्ष कलावती देवी महिला ने अपने एवं अपने परिवार के प्रति महिला एवं परिवार उत्पीड़न मामला लेकर मानवाधिकार संगठन कार्यालय में बहुत ही अमानवीय प्रशासनिक कार्यशैली के मुद्दे पर आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी। उन्होंने मानवाधिकार एवं संविधान के मौलिक अधिकार का हवाला देते हुए कहा है कि मुझे मेरे ही परिवार के लोग घर से बेदखल कर मारपीट करते हुए घर से बाहर कर दिया, जिसके कारण मेरा पूरा परिवार सड़क पर आ गया है। साथ ही वृद्ध महिला ने बताया कि मेरे साथ भी मारपीट की गई और मुझे जायदाद से बेदखल कर दिया गया। इन्हीं सब गंभीर मुद्दों को लेकर अपने परिवार के बचाव के लिए एवं अपराधियों से बचने के लिए अपने एवं अपने परिवार के सुरक्षा हेतु एफ आई आर करने के लिए थाना स्तर से लेकर एसएसपी कार्यालय, डीआईजी कार्यालय तक गई लेकिन कहीं भी मेरी सुनवाई नहीं हो रही है। थाना स्तर पर भी मेरे एफ आई आर को नहीं लिया जा रहा है। यह कैसा देश है अंग्रेज का शासन चला गया लेकिन यहां के पुलिस प्रशासन अंग्रेजी हुकूमत को अभी भी लागू कर हम लोगों पर काफी अत्याचार कर रहे हैं। मेरा एक पुत्र भारतीय सैनिक में है और भारत का सच्चा सैनिक है वह भी एसएसपी कार्यालय गया मगर उसे भी धक्के मार कर निकाल दिया गया। अब आप बताएं कि जो देश की रक्षा करता है उसके परिवार का रक्षा करना जिला प्रशासन का सरकार का दायित्व बनता है उन्हें भी नकार दिया गया। इधर मानवाधिकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ईशान सिन्हा ने कहा है कि संवैधानिक तौर पर मौलिक अधिकार प्रत्येक व्यक्ति को भारत में प्रदान की गई है आपके साथ जो भी अन्याय हुआ है उसके खिलाफ आवाज उठाई जाएगी एवं आपके साथ उचित न्याय हेतु संगठन कार्य अवश्य करेगा। जरूरत पड़ने पर भारत सरकार गृह मंत्रालय एवं राष्ट्रपति तक बातें पहुंचाई जाएगी। एक सैनिक के परिवार के साथ यह अन्याय और अमानवीय व्यवहार असंवैधानिक है।




