रिपोर्ट – पुरुषोत्तम कुमार!
जमुई में बिहार में बढ़ते अपराध और बर्बर पुलिस दमन के खिलाफ भाकपा-माले ने मोर्चा खोल दिया है। राज्यव्यापी आह्वान के तहत गुरुवार को कचहरी चौक स्थित अम्बेडकर स्थल पर प्रतिवाद सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के जिला सचिव बासुदेव राय ने की। इस दौरान वक्ताओं ने बिहार सरकार के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के राज्य कमेटी सदस्य बाबू साहब सिंह ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में बिहार में दोगुनी गति से अपराध बढ़ा है। आज प्रतिदिन दिनदहाड़े चोरी, डकैती, हत्या और बलात्कार जैसी घटनाएं हो रही हैं। अपराध पर अंकुश लगाने में पुलिस पूरी तरह विफल है, वहीं दूसरी ओर दलितों, गरीबों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर सामंती और पुलिसिया दमन बढ़ता जा रहा है। जमुई, पटना, गया, बेतिया सहित पूरे बिहार में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बेहरावां चकिया और पुनपुन मुशहर टोली में शराबबंदी की आड़ में पुलिस ने बर्बर दमन किया। छापेमारी के दौरान 32 महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि गिरफ्तारी से बचने के लिए पुनपुन नदी में कूदे दो लोगों को पुलिस ने पत्थर मारकर डुबोकर मार डाला। कुछ दिन पूर्व मछली बेचने वाले मल्लाह जाति के सुरेश महतो के पूरे परिवार को शराब बेचने के झूठे आरोप में पुलिस ने पीटा और अपमानित किया, जिससे आहत होकर उनके पुत्र रवि कुमार ने आत्महत्या कर ली। वहीं बेतिया में दिलशाद नामक मुस्लिम युवक की पुलिस कस्टडी में हत्या कर दी गई।
वहीं जिला सचिव शंभू शरण सिंह ने कहा कि भाजपा राज में समाज के कमजोर वर्गों पर सुनियोजित हमला हो रहा है। बुलडोजर कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस द्वारा हमला, जेल और हत्या की घटनाएं बढ़ी हैं। मुस्लिम, दलित और महिलाओं पर दमन लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि मंत्री जीतन राम मांझी के जिला गया में मुशहर समुदाय पर सामंतों का दमन बढ़ा है। 2024 में बकाया मजदूरी मांगने पर सज्जन मांझी की हत्या कर दी गई थी। पथरा में एक अधेड़ महिला के साथ बलात्कार कर हत्या, कुड़वा धर्मशाला निवासी अजय मांझी की भट्ठेदारों की सांठगांठ से पुलिस हिरासत में मौत और इसी 9 अक्टूबर को ईंट भट्ठा पर जबरन काम से इनकार करने पर 65 वर्षीय कांति देवी की सीने पर ईंट से हमला कर हत्या कर दी गई। यह दर्शाता है कि मौजूदा सरकार में दलित, गरीब, अल्पसंख्यक और महिलाओं पर हमले दोगुनी गति से बढ़े हैं।
इस प्रतिवाद सभा में मोहम्मद हैदर, किरण गुप्ता, शंभू मांझी, कृष्ण कुमार मालाकार, तुलसी मांझी, धर्मेंद्र मांझी, रत्न मांझी सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल थे।



