भावांजलि धरोहर-2026′ कार्यक्रम में  सीएम हुये शामिल,कहा- मन की शांति के लिये ज्ञान के साथ-साथ संगीत भी जरूरी!

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:- रवि शंकर अमित!

मुख्यमंत्री Patna Literary Festival द्वारा आयोजित ‘भावांजलि धरोहर-2026’ कार्यक्रम में हुए शामिल, कहा- मन की शांति के लिये ज्ञान के साथ-साथ संगीत भी जरूरी

मुख्य बिंदु-

संगीत की धुन और ताल मन को सुकून देने के साथ स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती हैं।

बिहार की भोजपुरी, मैथिली, अंगिका, वज्जिका और मगही सहित क्षेत्रीय भाषाएं हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक विद्यालयों में क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई शुरू करने की दिशा में कार्य किया गया है।

संगीत के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पी०पी०पी०) के माध्यम से कोई पहल करना चाहते हैं, तो राज्य सरकार उसका स्वागत करेगी।

पटना, 15 अक्टूबर 2026 मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी आज बापू टावर, पटना में Patna Literary Festival की ओर से आयोजित ‘भावांजलि धरोहर-2026’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने नवरात्र की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस पावन अवसर पर यहां आने का मौका मिला है। ऐसे आयोजन विकास और विरासत के साथ-साथ बिहार की समृद्ध सभ्यता, संस्कृति, साहित्य और ज्ञान परंपरा पर चर्चा करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है। भोजपुरी, मैथिली, अंगिका, वज्जिका और मगही जैसी क्षेत्रीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। इन भाषाओं के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक विद्यालयों में क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई शुरू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे।

मुख्यमंत्री ने बिहार की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत इस बात का प्रमाण है कि हजारों वर्ष पहले भी हमारी सभ्यता और संस्कृति अत्यंत समृद्ध थी। बिहार ज्ञान और शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि अगले एक वर्ष में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में राज्य सरकार कार्य करेगी। इससे बिहार की शैक्षणिक विरासत को नई पहचान मिलेगी और ज्ञान के क्षेत्र में राज्य की भूमिका और मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में ज्ञान के साथ-साथ संगीत भी आवश्यक है। संगीत की धुन और ताल मन को सुकून प्रदान करते हैं तथा स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। उन्होंने कहा कि यदि संगीत के क्षेत्र में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पी०पी०पी०) के माध्यम से कोई पहल करना चाहते हैं, तो राज्य सरकार उसका स्वागत करेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक संध्या के दौरान मॉस्को, रूस से आई डॉ० श्वेता सिंह उमा की गायकी तथा प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना संयुक्त्ता सिन्हा की कथक प्रस्तुति देखी।

‘भावांजलि धरोहर-2026’ कार्यक्रम साहित्य, कला, संस्कृति, धरोहर और विचारों को एक मंच पर लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस आयोजन के माध्यम से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक परंपराओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम में Patna Literary Festival के संस्थापक एवं सचिव श्री खुर्शीद अहमद ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। Patna Literary Festival के अध्यक्ष श्री सत्यजीत ने स्वागत संबोधन किया।

इस अवसर पर भवन निर्माण तथा कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव श्री प्रणव कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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