मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन, एक महीने के अंदर ही पुल में नजर आने लगा कई जगहों से दरारें!

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रिपोर्ट – धर्मेंद्र कुमार!

13 करोड़ का हरदिया-मजूरहा पुल बना सवालों का पुल!

पूर्व CM नीतीश के प्रगति यात्रा में शिलान्यास, समृद्धि यात्रा में निरीक्षण और CM सम्राट के हाथों उद्घाटन के 20-25 दिन बाद एप्रोच पथ में आधा दर्जन से अधिक जगह दरार-धंसान

पहले 15-20 मीटर सड़क फटी, मरम्मत के बाद फिर उभरी दरारें; पीचिंग-चेपी से खानापूर्ति का आरोप, निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

पूर्वी चंपारण के हरदिया-मजूरहा में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से तैयार आरसीसी पुल अब विकास की पहचान से ज्यादा अपनी दरारों को लेकर सवालों में है। जिस पुल का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रगति यात्रा के दौरान किया था, निर्माण के दौरान समृद्धि यात्रा पर मोतिहारी पहुंचे नीतीश कुमार ने इसका निरीक्षण भी किया था, उसी महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण पूरा होने के बाद बापूधाम महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गांधी मैदान से भव्य कार्यक्रम में उद्घाटन किया था। लेकिन उद्घाटन के महज 20-25 दिनों के भीतर ही पुल के एप्रोच पथ की हालत ने पूरे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एप्रोच पथ के दोनों तरफ एक-दो नहीं, बल्कि करीब आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर दरार और धंसान सामने आने की बात कही जा रही है। इससे पहले भी पुल के एक छोर पर करीब 15-20 मीटर तक सड़क फटने और धंसने की समस्या सामने आई थी। मामला सामने आने के बाद मरम्मत कराई गई, लेकिन अब दोबारा कई जगह दरार और धंसान ने उस मरम्मत की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

करोड़ों का पुल, लेकिन 25 दिन में दरार क्यों?

यह सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि सामान्य सड़क नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार पुल का एप्रोच पथ इतनी कम अवधि में क्षतिग्रस्त होने लगा है। आखिर निर्माण के दौरान ऐसा क्या छूट गया कि उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क में दरार पड़ने लगी और कई जगह जमीन धंसने लगी?

क्या एप्रोच पथ के लिए मिट्टी की गुणवत्ता की पर्याप्त जांच हुई थी? क्या भराई के बाद मानक के अनुरूप कॉम्पैक्शन किया गया था? क्या सड़क की मोटाई और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच की गई? क्या जल निकासी की समुचित व्यवस्था थी? इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग को देना होगा।

पहली खराबी के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति

हरदिया-मजूरहा पुल के एप्रोच पथ में यह पहली शिकायत नहीं है। पहले करीब 15-20 मीटर सड़क में बड़ी दरार और धंसान सामने आई थी। इसके बाद विभाग की ओर से मरम्मत कराई गई।

लेकिन आरोप है कि सड़क की वास्तविक तकनीकी खामी तलाशने के बजाय सिर्फ पीचिंग और चेपी लगाकर ऊपरी तौर पर मरम्मत कर दी गई। अब दोबारा दरार और धंसान सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या पहली मरम्मत सिर्फ खानापूर्ति थी?

अगर मूल समस्या दूर की गई थी तो फिर इतनी जल्दी सड़क दोबारा क्यों टूटने लगी?

इस परियोजना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह योजना तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यात्राओं से जुड़ी रही। प्रगति यात्रा में शिलान्यास हुआ। निर्माण के दौरान समृद्धि यात्रा में निरीक्षण हुआ। निर्माण पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बापूधाम महोत्सव के दौरान इसका उद्घाटन किया।

सरकार के शीर्ष स्तर तक जिसकी निगरानी और चर्चा रही, उसी परियोजना में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद दरार और धंसान की शिकायत सामने आना गुणवत्ता की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

पूर्व विधायक ने लगाया कथित घोटाले का आरोप

मामले को लेकर स्थानीय पूर्व विधायक राजेंद्र राम ने निर्माण कार्य में कथित बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और निर्माण से जुड़े लोगों की कथित मिलीभगत से योजना में बड़ा खेल हुआ और सरकारी राशि के बंदरबांट की स्थिति बनी।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच से ही आरोपों की सच्चाई सामने आ सकती है।

अब सिर्फ मरम्मत नहीं, तकनीकी जांच की जरूरत

पुल के एप्रोच पथ में बार-बार दरार और धंसान सामने आने के बाद सिर्फ ऊपर से पीचिंग करना स्थायी समाधान नहीं हो सकता। जरूरत इस बात की है कि पूरे एप्रोच पथ की तकनीकी जांच कराई जाए।

मिट्टी की भराई से लेकर कॉम्पैक्शन, सड़क की मोटाई, निर्माण सामग्री, जल निकासी और डिजाइन तक की जांच होनी चाहिए। साथ ही पहले कराई गई मरम्मत की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में आनी चाहिए!

13 करोड़ रुपये की परियोजना में उद्घाटन के 20-25 दिन बाद ही दरार क्यों? पहले फटी 15-20 मीटर सड़क की मरम्मत के बाद फिर दरार क्यों? एप्रोच पथ की मिट्टी और कॉम्पैक्शन की जांच किस स्तर पर हुई? निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? अगर तकनीकी जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार कौन होगा?क्या प्रशासन फिर सिर्फ दरार पर मरहम लगाएगा या करोड़ों के निर्माण की दरार की जड़ तक पहुंचकर जिम्मेदारी भी तय करेगा?हरदिया-मजूरहा पुल की दरार अब सिर्फ सड़क की खराबी नहीं रह गई है। यह करोड़ों रुपये की सरकारी योजना की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही की परीक्षा बन चुकी है।

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