बंदोबस्त कार्यालय दुमका में नहीं थम रहा रैयतों का भयादोहन

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शंखनाद संवाददाता

जाली व फर्जी आदेश देने वाले पेशकार को दे दिया गया तीन शिविरों का प्रभार

अबुआ राज में आदिवासियों को ही नहीं मिल रहा न्याय

दुमका

बंदोबस्त कार्यालय दुमका में ब्याप्त भ्रष्टाचार के मामलों पर लगाम लगाने में सरकार एवं वरिष्ठ पदाधिकारी उदासीन बने हुए हैं| अबुआ राज में गरीब आदिवासियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है|जमीन के रक्षक ही भक्षक बन गए हैं|वरीय पदाधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मियों को और जिम्मेदारी सौंपकर सम्मानित कर रहे हैं|बंदोबस्त कार्यालय दुमका में कभी सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर टीएल केश में आदेश कर देते हैं, कभी गरीब विधवा आदिवासी महिला की जमीन का नकली वह जाली पर्चा बना कर जाली नकल दे दिया जाता है तो कभी नकल में दूसरों का नाम जोड़ दिया जाता है या रैयत का नाम ही काट दिया जाता है|जाली व फर्जी आदेश व नकल देकर गरीब रैयतों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है|विभिन्न शिविरों में पदस्थापित पेशकारो द्वारा गरीब रैयतों को लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है|

ऐसा ही एक मामला शिकारीपाड़ा शिविर से सामने आया है, वहां के तात्कालीन पेशकार सत्येन्द्र सिंह ने गरीब आदिवासी मोतीलाल सोरेन को जाली व फर्जी आदेश दे दिया|मोतीलाल ने मामले की शिकायत आयुक्त संथाल परगना परिक्षेत्र दुमका से करते हुए न्याय की गुहार लगाई है|आयुक्त ने मामले में दो सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है|प्रमंडलीय आयुक्त का कार्यालय, संथाल परगना प्रमंडल के पत्रांक 356 , 10 -12-21 द्वारा मांगी गई जांच रिपोर्ट अबतक नहीं दी गई है| बताते चलें कि बंदोबस्त कार्यालय दुमका में जाली व फर्जी आदेश एवं नकल का धंधा वर्षों से किया जा रहा है|

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