मंडल कारा मधुबनी मे मौत पटना सचिवालय तक गूंजा आवाज, फुलपरास में महाआंदोलन का शंखनाद!

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रिपोर्टर– राजीव कुमार झा!

रौशन हत्याकांड मामले में सरकारी डैशबोर्ड पर भी मामला दर्ज, गली- महल्लों में दहाड़ की तैयारी

समाजवादियों ने किया महाधरना का ऐलान, पूर्व मंत्री ने थामी आंदोलन की मशाल

ऐंकर– मधुबनी में मीडिया सम्मान समारोहों के बीच जमीनी सवाल जस का तस बना हुआ हैं। जिनमें सबसे प्रमुख सवालों मे है पत्रकार के उपर निजी नर्सिंग होम संचालक और उनके गुर्गे द्वारा जानलेवा हमला, तो राँटी जेल में 19 वर्षीय रौशन यादव की रहस्यमय मौत का मामला दूबारा से गरमाया हुआ दिखाई दे रहा है। अब इस मामले में बड़ा मोड़ आता हुआ दिखाई दे रहा है। पत्र संख्या 5542364/मु.मं.स. (21/09/26) के अनुसार मामला सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुँच गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेन्द्र प्रसाद यादव ने 10 अगस्त 2026 को ई-मेल के जरिए मामले को लेकर उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की थी। मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव अभिषेक श्रीवास्तव ने प्रधान सचिव, गृह विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मामले की छानबीन कर समुचित निर्णय लिया जाए और कार्रवाई की रिपोर्ट पूर्व मंत्री तथा सीएम सचिवालय को भेजी जाए। जिसका क्यू आर कोड 2026062492 सरकारी डैशबोर्ड पर दर्ज है, जिससे स्पष्ट है कि रौशन हत्याकांड अब केवल फुलपरास या मधुबनी का नहीं, बल्कि पटना सचिवालय तक गूंजने वाला मामला बन गया है। इस मामले को लेकर लोहिया आश्रम, फुलपरास में पूर्व विधायक रामकुमार यादव की अध्यक्षता में समाजवादी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें पूर्व विधायक सीताराम यादव, राजेश सिंह, प्रोफेसर औसाफ लड्डन, आजाद गुप्ता सहित कई नेता मौजूद रहे। बैठक में तय किया गया कि रौशन हत्याकांड, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, रोजगार- महंगाई- बढते अपराध-भ्रष्टाचार के विरुद्ध जिला स्तर पर विशाल शांतिपूर्ण महाधरना त्योहार- पर्व के बाद आयोजित किया जाएगा। बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि सरकार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर गंभीर नहीं है। धार्मिक मुद्दों और जातीय गोलबंदी से प्रदेश को बर्बादी के कगार पर ले जाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सियासत अब जनसेवा का माध्यम नहीं, बल्कि सत्ता और धन प्राप्ति का साधन बन गई है। बैठक के दौरान गणेश शंकर विद्यार्थी के विचार को भी दोहराया गया— कलम सत्ता से सवाल पूछने के लिए है, माला पहनने के लिए नहीं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से सवाल किया कि बंद पड़ी लोहट (1914), सकरी, रैयाम चीनी मिल और अशोक पेपर मिल कब चालू होंगी..? बाढ़ का स्थायी हल क्या है…? और सबसे बड़ा सवाल—राँटी जेल में रौशन की मौत का जिम्मेवार कौन है…? बैठक मे मौजूद नेताओं ने इन मामले को गंभीरता से उठाया है।

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