:- रवि शंकर अमित/बबलू राय!
कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान बीएसएफ जवान मनीष कुमार शहीद, तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचा बेगूसराय, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई।
बेगूसराय के लाल और बीएसएफ जवान मनीष कुमार सिंह जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए।
ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां करीब दो दिनों तक वेंटिलेटर पर उनका इलाज चला। लेकिन बुधवार को इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।शहीद मनीष कुमार सिंह का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर बेगूसराय के रतनपुर स्थित उनके पैतृक आवास पहुंचा तो पूरा इलाका गमगीन हो गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
वीर सपूत के सम्मान में रतनपुर से तिरंगा यात्रा भी निकाली गई, जो हर-हर महादेव चौक पहुंचकर समाप्त हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए और “शहीद मनीष कुमार अमर रहें” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
तस्वीरें बेगूसराय के रतनपुर की हैं
जहां आज हर आंख नम है और हर दिल में अपने वीर सपूत को खोने का गम है।तिरंगे में लिपटा मनीष कुमार का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक घर पहुंचा, लोगों की आंखें नम हो गईं। बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे और वीर जवान को श्रद्धांजलि दी।मनीष कुमार सिंह जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में बीएसएफ जवान के रूप में देश के सीमा की सुरक्षा में तैनात थे। परिजनों के मुताबिक करीब चार दिन पहले ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद बुधवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।मनीष की शहादत की खबर जैसे ही रतनपुर स्थित उनके घर पहुंची, परिवार में चीख-पुकार मच गया । परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
परिजनों के अनुसार, मनीष कुमार ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभाई थी। परिवार का दावा है कि उन्होंने देश की सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील अभियानों में जिम्मेदारी निभाई और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपनी ड्यूटी को हमेशा प्राथमिकता दी।
परिजनों ने यह भी बताया कि मनीष के शरीर पर गोली लगने के पुराने निशान थे। परिवार के मुताबिक सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तैनाती के दौरान उन्होंने कई बार जोखिम उठाया था।
रतनपुर के लोगों के बीच मनीष कुमार एक खुशमिजाज, मिलनसार और सरल स्वभाव के जवान के तौर पर जाने जाते थे। छुट्टी में जब भी घर आते थे, ग्रामीणों से आत्मीयता से मिलते और उनका हालचाल लेते थे। यही वजह है कि मनीष की शहादत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि मनीष सिर्फ अपने परिवार का बेटा नहीं, बल्कि पूरे रतनपुर और बेगूसराय के गौरव थे। शहीद के सम्मान में निकली तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। हाथों में तिरंगा और जुबां पर वीर सपूत के सम्मान के नारे थे।शहीद मनीष कुमार अमर रहें भारत माता की जय के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।आज रतनपुर ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी है, लेकिन मनीष कुमार की देशभक्ति और उनकी शहादत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।



