रिपोर्ट – रुपेश कुमार!
औरंगाबाद जहां एक तरफ बिहार सरकार एवम् जिला अधिकारी ने सभी जिले के प्रमुख अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर को निर्देश जारी किया है कि लोगो के मृत्यु के उपरांत प्रतिवेदन, हॉस्पिटल को 24 घंटे के अंदर थाना को उपलब्ध कराते हुए 48 घंटे के अंदर कोर्ट को प्रस्तुत करना है!
लेकिन सदर अस्पताल औरंगाबाद की हकीकत कुछ और ही, है , जहां पोस्टमार्टम तथा इंज्यूरी का सैकड़ों रिपोर्ट लंबित है जिसको लेकर औरंगाबाद सिविल कोर्ट ने सदर हॉस्पिटल के उपाधीक्षक आशुतोष कुमार को शौक़ौज करते हुए 5000 रूपये का जुर्बाना लगाया है वही न्यायालय के द्वारा उनकी वेतन पर भी अनिश्चित काल के लिए रोक लगा दिया गया है ,
इस संबंध में जब सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉक्टर आशुतोष कुमार ने पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम तथा इंज्यूरी रिपोर्ट में विलंब होने के कारण न्यायालय के द्वारा जुर्माना लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है , जिसको लेकर आज 3 सितंबर को न्यायालय में तकरीबन 3:00 बजे मैं अपनी स्पष्टीकरण प्रस्तुत करूंगा
जब उनसे यह पूछा गया कि आखिर इस तरह का शिकायत औरंगाबाद हॉस्पिटल में अक्सर देखने को मिलता है, जिसपर उन्होंने बताया है कि बहुत सारे रिपोर्ट तो लिखकर रखा हुआ रहता है लेकिन थाने की लापरवाही के कारण न्यायालय में समय पर प्रस्तुत नहीं किया जाता है, वही कुछ रिपोर्ट डॉक्टरों की कमी होने के कारण समय पर डॉक्टर नहीं लिख पाते है जिसके कारण रिपोर्ट न्यायालय तक पहुंचने में विलंब हो जाती है उन्हों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मामले में मै कही से दोषी नहीं हु ,हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि मैं न्यायालय का सम्मान करता हु और आज मैं खुद न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का काम करूंगा।




