आरा/आशुतोष पाण्डेय
दो घर नदी में समाए, सौ से अधिक ग्रामीणों ने छोड़ा गांव; सामान लेकर सुरक्षित ठिकानों की ओर जाते दिखे लोग, विद्यालय में बनाया गया आश्रय स्थल
भोजपुर के बड़हरा प्रखंड अंतर्गत पिपरपांती गांव में मंगलवार को गंगा नदी के तेज कटाव ने ग्रामीणों के बीच दहशत पैदा कर दी। करीब 11:30 बजे कटाव की रफ्तार अचानक तेज होने के बाद नदी गांव की ओर तेजी से बढ़ने लगी। कटाव स्थल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। देखते ही देखते कई परिवारों ने अपने पुश्तैनी घरों को छोड़ दिया। ग्रामीणों की आंखों में घर उजड़ने का दर्द और वर्षों से बसे गांव को छोड़ने की मजबूरी साफ दिखाई दे रही थी।कटाव की भयावह स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने कटाव स्थल का निरीक्षण करने के साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए स्थानीय विद्यालय में आश्रय स्थल बनाया। वहां पीड़ित परिवारों के रहने, खाने और पीने की व्यवस्था की गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की टीम को भी मौके पर तैनात किया गया है।
अचानक तेज हुआ कटाव, घर छोड़कर भागने लगे लोग
ग्रामीणों के अनुसार मंगलवार की सुबह तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन करीब 11:30 बजे गंगा नदी के कटाव की रफ्तार अचानक बढ़ गई। नदी की तेज धारा तेजी से गांव की ओर जमीन को काटने लगी। कटाव स्थल के समीप रहने वाले लोगों को जब घरों पर खतरा मंडराता दिखाई दिया तो वे अपना सामान समेटने लगे।किसी ने घर का जरूरी सामान वाहन पर लादा तो कोई अपने सिर पर गठरी लेकर सुरक्षित स्थान की ओर जाता नजर आया। महिलाओं और बच्चों को पहले सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। कई परिवार अपने रिश्तेदारों के घर जाने के लिए मजबूर हो गए।कटाव स्थल के आसपास रहने वाले लोगों के बीच इस कदर भय का माहौल रहा कि लोग घर में कुछ भी छोड़ना नहीं चाहते थे। चारपाई, बिस्तर, अनाज, कपड़े, बर्तन, पेटी-बक्सा और अन्य घरेलू सामान वाहनों पर लादकर लोग गांव से बाहर निकलते रहे।
आंखों में आंसू, जुबान पर पुश्तैनी घर की याद
गांव छोड़कर जाने वाले ग्रामीणों के चेहरे पर डर के साथ अपने घर और गांव से बिछड़ने का गम भी साफ दिखाई दे रहा था। कई परिवारों के लिए यह महज मकान छोड़ना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से बसे अपने पुश्तैनी घर को छोड़ने जैसा था। ग्रामीणों का कहना था कि जिस घर में उनका बचपन बीता, जहां उनके माता-पिता और पूर्वजों की यादें जुड़ी हैं, उसे अपनी आंखों के सामने नदी में समाते देखना बेहद पीड़ादायक है।कटाव के करीब रहने वाले परिवारों में सबसे अधिक चिंता छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को लेकर दिखी। अचानक घर छोड़ने के कारण लोगों को कपड़े, भोजन, रहने की जगह और रोजमर्रा की जरूरतों की चिंता सताने लगी। कई परिवारों के पास अपना सामान सुरक्षित रखने और रात गुजारने की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी।
ग्रामीणों का कहना था कि घर छोड़कर निकलना उनकी मजबूरी है। नदी कब किस हिस्से को काट लेगी, इसका कोई भरोसा नहीं है। ऐसे में जान बचाना ही सबसे पहली प्राथमिकता है।
दो घर गंगा में समाए, दस घर समाहित होने का मुखिया का दावा
कटाव के कारण अब तक करीब दो घर गंगा नदी में विलीन होने की बात सामने आई है। हालांकि पिपरपांती पंचायत के मुखिया राहुल पांडेय ने बताया कि कटाव की चपेट में आकर अब तक करीब 10 घर गंगा नदी में समाहित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि कटाव लगातार तेजी से हो रहा है और यदि तत्काल प्रभावी ढंग से कटावरोधी कार्य नहीं कराया गया तो कई और घर नदी की धारा में समा सकते हैं।
मुखिया ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने और कटाव रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कराने की मांग की है।
सौ से अधिक ग्रामीणों ने छोड़ा गांव
कटाव की गंभीरता को देखते हुए पिपरपांती गांव के सौ से अधिक ग्रामीण अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं। कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं, जबकि कुछ परिवारों ने स्थानीय विद्यालय में बनाए गए आश्रय स्थल में शरण ली है।
प्रशासन की ओर से विद्यालय में प्रभावित परिवारों के लिए रहने और भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। हालांकि अचानक घर छोड़ने के कारण ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को अपने मवेशियों, घरेलू सामान और खेती-किसानी से जुड़ी वस्तुओं को सुरक्षित रखने की भी चिंता है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
कटाव की सूचना मिलते ही जिला और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचे। एडीएम आपदा कमर आलम, एसडीओ अंशु कुमारी और सीओ अंशु प्रसुमन मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेते रहे। अधिकारियों ने कटाव स्थल का निरीक्षण करने के साथ प्रभावित लोगों से भी जानकारी ली।अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। प्रशासन की ओर से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है। कटाव की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय विद्यालय को आश्रय स्थल के रूप में तैयार किया गया है, ताकि प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित जगह उपलब्ध हो सके।
एसडीआरएफ टीम तैनात
कटाव की भयावहता को देखते हुए प्रशासन ने एसडीआरएफ की टीम को भी मौके पर तैनात किया है। टीम की मौजूदगी से नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ा है। प्रशासन की ओर से नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और खतरे की स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। कटाव की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत व बचाव कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
पेड़ की टहनियां और झाड़ियों से शुरू हुआ कटावरोधी कार्य
बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता अभिषेक कुमार ने बताया कि पिपरपांती में गंगा का कटाव तेजी से हो रहा है। कटाव को नियंत्रित करने के लिए तत्काल प्रभाव से कटावरोधी कार्य शुरू किया गया है। फिलहाल पेड़ की टहनियां, झाड़ी आदि डालकर नदी की धारा की तीव्रता को कम करने और कटाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कटाव की गति और नदी की धारा को देखते हुए आवश्यकतानुसार आगे भी कटावरोधी कार्य कराया जाएगा।
वर्ष 2016 में भी मची थी तबाही
पिपरपांती में गंगा नदी के कटाव का इतिहास पुराना है। वर्ष 2016 में भी गांव में भीषण कटाव हुआ था। उस समय गंगा नदी ने भारी तबाही मचाई थी और दो दर्जन से अधिक घर नदी में विलीन हो गए थे। कटाव से बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रभावित हुए थे।
उस दौरान प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से कटावरोधी कार्य भी कराया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले अनुभव को देखते हुए इस बार भी समय रहते ठोस और स्थायी व्यवस्था किए जाने की जरूरत है, ताकि गांव के बचे हुए घरों को नदी की धारा से बचाया जा सके।
स्थायी कटावरोधी उपाय की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गंगा के जलस्तर और कटाव को लेकर चिंता बनी रहती है। जब नदी की धारा गांव की ओर बढ़ती है तो लोगों को अपने घर और जमीन बचाने की चिंता सताने लगती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से केवल तत्काल कटाव रोकने के उपाय ही नहीं, बल्कि स्थायी कटावरोधी कार्य कराने की मांग की है।लोगों का कहना है कि यदि मजबूत तटबंध और स्थायी कटावरोधी संरचना तैयार नहीं की गई तो आने वाले समय में गांव के और घर इसकी चपेट में आ सकते हैं।
सामान बचाने की जद्दोजहद में जुटे रहे ग्रामीण
कटाव की सूचना के बाद ग्रामीण अपने घरों से सामान निकालने में जुटे रहे। जिस सामान को लोग वर्षों से संभालकर रखते आए थे, उसे बचाने के लिए परिवार के सदस्य एक-दूसरे का हाथ बंटाते दिखाई दिए। कई लोगों ने वाहनों की मदद से सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।किसी के लिए घर का अनाज महत्वपूर्ण था तो किसी के लिए बच्चों की किताबें और कपड़े। महिलाएं घर का सामान समेटती रहीं और पुरुष उसे वाहनों पर लादते रहे। इस दौरान कई परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि वे रात कहां गुजारेंगे और अगले दिन की जिंदगी कैसे शुरू करेंगे।
‘घर बचाने की उम्मीद थी, अब सामान बचाने की चिंता’
कटाव स्थल के पास ग्रामीणों की स्थिति बेहद भावुक करने वाली रही। कुछ लोग नदी की ओर टकटकी लगाए अपने घरों को देखते रहे तो कुछ तेजी से सामान निकालने में जुटे थे। लोगों को उम्मीद थी कि किसी तरह उनका घर बच जाएगा, लेकिन कटाव बढ़ता देख उन्हें अपना सामान बचाने की चिंता सताने लगी।
ग्रामीणों का कहना था कि नदी के किनारे वर्षों से उनका जीवन बीता है। खेत, घर और गांव ही उनकी पहचान रहे हैं। अचानक नदी के कटाव के कारण सब कुछ छोड़कर जाना उनके लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है।प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित रखने पर दिया जोरप्रशासनिक अधिकारियों ने फिलहाल प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया है। विद्यालय में आश्रय स्थल बनाए जाने से लोगों को तत्काल रहने की जगह मिली है। प्रशासन की ओर से खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई है। साथ ही कटाव की स्थिति को देखते हुए मौके पर अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी बनी हुई है।
ग्रामीणों की मांग है कि राहत व्यवस्था के साथ-साथ जिन परिवारों के घर नदी में समा गए हैं या जिनके घरों पर खतरा मंडरा रहा है, उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराई जाए। लोगों ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों के नुकसान का आकलन कर आवश्यक मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था करने की भी मांग की है।
तेज कटाव ने बढ़ाई चिंता
मंगलवार को अचानक तेज हुए कटाव ने पिपरपांती के ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। एक तरफ नदी लगातार जमीन काट रही है तो दूसरी तरफ ग्रामीण अपने आशियाने बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम कटाव को नियंत्रित करने में जुटी है, लेकिन ग्रामीणों को अब भी स्थायी समाधान का इंतजार है।फिलहाल पिपरपांती गांव में हर तरफ चिंता का माहौल है। नदी की ओर बढ़ते कटाव को देखते हुए ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और कटावरोधी कार्य पर टिकी हुई हैं। जिन परिवारों ने अपना घर छोड़ दिया है, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित ठिकाना, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों की व्यवस्था करना है। वहीं, गांव में रह गए परिवार भी इस आशंका में हैं कि पता नहीं अगला घर किसका होगा, जिसे गंगा अपनी धारा में समेट लेगी।


