रिपोर्ट – अरविंद कुमार!
समस्तीपुर के रोसड़ा की भूमि सुधार उप-समाहर्ताडीसीएलआर (DCLR) कंचन कुमारी झा से जुड़े कथित रिश्वत कांड में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मंगलवार को एक बार फिर रोसड़ा पहुंचकर जांच की। इस बार निगरानी टीम का फोकस DCLR डीसीएलआर कार्यालय में रखे सरकारी अभिलेखों और संबंधित भूमि विवाद की फाइलों पर रहा।
निगरानी की टीम ने कार्यालय पहुंचकर मामले से जुड़े कागजात और विभिन्न अभिलेखों की गहन पड़ताल की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण कागजात टीम द्वारा जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, जिस मामले को लेकर कथित तौर पर रिश्वत की कार्रवाई हुई थी, उससे संबंधित कुछ आवश्यक कागजात कार्यालय की फाइलों में उपलब्ध नहीं मिले। इसके बाद निगरानी टीम ने इस बिंदु को भी अपनी जांच के दायरे में ले लिया है।
रिश्वत कांड के बाद अब सरकारी फाइलों की पड़ताल
दरअसल, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 25 अगस्त 2026 को रोसड़ा की तत्कालीन डीसीएलआर कंचन कुमारी झा और उनके कथित सहयोगी/घरेलू नौकर सुमित कुमार (दलाल) के खिलाफ निगरानी थाना कांड संख्या 103/2026 दर्ज करते हुए कार्रवाई की थी।
निगरानी की टीम ने दोनों को ₹2 लाख रिश्वत से जुड़े ट्रैप में गिरफ्तार किया गया था। कार्रवाई के दौरान करीब ₹37 हजार कीमत की वॉशिंग मशीन का भी बरामदगी किया गया है। इसके बाद आवास की तलाशी में ₹13.82 लाख अतिरिक्त नकद बरामद होने की बात निगरानी ब्यूरो ने कही थी।
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ अब निगरानी टीम यह भी खंगाल रही है कि जिस भूमि विवाद/प्रकरण को लेकर कथित रिश्वत की मांग और कार्रवाई हुई, उसकी सरकारी फाइल में कौन-कौन से दस्तावेज थे और वर्तमान में वे कहां हैं।
कार्यालय से कागजात गायब मिलने का मामला गंभीर
आज की जांच में संबंधित प्रकरण के कुछ कागजात कार्यालय में नहीं मिलने की बात सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। निगरानी टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कागजात किस स्तर पर कार्यालय से गायब हुए, उन्हें किसने हटाया और उनका इस्तेमाल किसी प्रक्रिया में हुआ या नहीं।
हालांकि, इन दस्तावेजों के गायब होने के पीछे किसकी भूमिका है, इसे लेकर अभी निगरानी की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
बैंक खातों से लेकर जमीन के दस्तावेज तक जांच के घेरे में
निगरानी ब्यूरो के अनुसार, जांच में तीन बैंक खातों की जानकारी भी मिली थी, जिनमें क्रमशः ₹7.06 लाख, ₹2.31 लाख और ₹90 हजार जमा होने की बात सामने आई। इन खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई की गई है।
इसके अलावा ग्रामीण जमीन की खरीद से संबंधित दो दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है, जिनकी जांच जारी है।
ट्रैप के दौरान बरामद रिश्वत की राशि तथा आरोपित के हाथों के धोवन प्रदर्श को भी वैज्ञानिक जांच के लिए भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच अब सिर्फ कथित रिश्वत की रकम तक सीमित नहीं दिख रही है। सरकारी कार्यालय की फाइलों, संबंधित भूमि विवाद के दस्तावेज, बैंक खातों, संपत्ति से जुड़े कागजात और कार्यालय से गायब मिले अभिलेखों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख जानबूझकर हटाए गए या गायब किए गए, तो इस संबंध में भी अलग से कानूनी कार्रवाई या मामले में अतिरिक्त धाराएं जुड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल निगरानी टीम पूरे मामले की जांच और साक्ष्य जुटाने में लगी है।
डीसीएलआर कार्यालय की महत्वपूर्ण फाइलों से संबंधित कागजात आखिर कहां गए?
क्या ये दस्तावेज सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कहीं भेजे गए थे या फिर इन्हें जानबूझकर हटाया गया?
और यदि दस्तावेज हटाए गए, तो इसके पीछे किसकी भूमिका थी?
इन सवालों के जवाब अब निगरानी की आगे की जांच से सामने आने की उम्मीद है।



