मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री से की मुलाकात,सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण पर हुई विस्तृत चर्चा!

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:- रवि शंकर अमित!

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री से की मुलाकात, बिहार की प्रमुख सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को गति देने पर हुई विस्तृत चर्चा

मुख्य बिंदु :-

कोसी-मेची अंतर्राज्यीय रिवर लिंक परियोजना सहित केन्द्रीय बजट में घोषित लंबित सिंचाई एवं बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं की स्वीकृति और केंद्रीय सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने का आग्रह।

इंद्रपुरी जलाशय योजना, सोन फल्गु नदी जोड़ योजना तथा सारण जिला बाढ़ नियंत्रण एवं जलनिकासी परियोजना (फेज-1) को केंद्रीय बजट 2026-27 में शामिल करने का अनुरोध ।

फरक्का बराज एवं भारत-बांग्लादेश जल संधि से उत्पन्न गाद, नदी की धारा में बदलाव और बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति एवं समर्पित कोष बनाने का आग्रह।

कोसी हाई डैम, कमला डैम एवं बागमती डैम जैसी नेपाल से संबंधित लंबित परियोजनाओं के सर्वेक्षण एवं डी०पी०आर० कार्य में तेजी लाने का आग्रह।

पटना 31 अगस्त 2026 : मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी०आर० पाटिल से मुलाकात कर बिहार से संबंधित महत्वपूर्ण जल संसाधन, सिंचाई एवं बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी उपस्थिति में केन्द्रीय बजट 2024-25 एवं 2025-26 में बिहार के लिए घोषित योजनाओं की वर्तमान स्थिति, लंबित स्वीकृतियों तथा आगामी परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री को बताया कि केंद्रीय बजट 2024-25 में बिहार के लिए 11,500 करोड़ रुपये की लागत वाली कोसी मेची अंतर्राज्यीय रिवर लिंक परियोजना सहित सिंचाई एवं जल संसाधन क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की गई थी। इसके तहत बिहार सरकार ने 16,339.18 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का डी०पी०आर० केंद्र सरकार को उपलब्ध कराया है, इनमें अब तक केवल दो परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है।

बैठक में कोसी-मेची अंतर्राज्यीय रिवर लिंक परियोजना पर विशेष रूप से चर्चा हुई। लगभग 3,652.56 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य कोसी बेसिन के अतिरिक्त जल का बेहतर उपयोग करते हुए उत्तर बिहार में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है। परियोजना के प्रथम चरण के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 395.41 करोड़ रुपये तथा 2026-27 में 570 करोड़ रुपये, यानी कुल 965.41 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अब तक 156.745 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रथम चरण की शेष राशि शीघ्र उपलब्ध कराने तथा दूसरे चरण के डी०पी०आर० को मंजूरी देने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने सिकरहना दायां तटबंध निर्माण योजना का भी मुद्दा उठाया। 125.08 करोड़ रुपये केन्द्रीय अंश वाली यह योजना पहले ही संबंधित केन्द्रीय समिति द्वारा अनुशंसित की जा चुकी है। बैठक में इसके लिए केन्द्रीय सहायता जल्द उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। इसके अलावा केन्द्रीय बजट 2024-25 के तहत प्रस्तावित अन्य योजनाओं की स्थिति पर भी विचार-विमर्श हुआ। इनमें सिंचाई क्षेत्र की तीन परियोजनाएं जिनकी अनुमानित लागत 5,951.45 करोड़ रुपये है तथा बाढ़ प्रबंधन क्षेत्र की 15 परियोजनाएं जिनकी अनुमानित लागत 3,896.14 करोड़ रुपये है, वर्तमान में जल शक्ति मंत्रालय के विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन हैं।

बैठक में केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के विस्तार, नवीकरण एवं आधुनिकीकरण (ERM) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस परियोजना के लिए बिहार सरकार ने 8,338.89 करोड़ रुपये का डी०पी०आर० केन्द्रीय जल आयोग को भेजा है। केंद्र से सहायता मिलने की अपेक्षा में राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से 3,484.24 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रथम चरण का कार्य शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने परियोजना की शीघ्र स्वीकृति और केन्द्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ नियंत्रण के लिए चल रहे फ्लड मैनेजमेंट एंड बॉर्डर एरिया प्रोग्राम (FMBAP) के अंतर्गत बिहार के लिए बजटीय प्रावधान बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार देश के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्यों में से एक है। रा लगभग 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आता है और गंगा, कोसी, गंज बागमती जैसी नदियों के कारण हर वर्ष बड़ी आबादी प्रभावित होती है। ऐसे में जरूरतों के अनुरूप अधिक केन्द्रीय सहायता आवश्यक है।

बैठक में आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में बिहार की तीन बड़ी परियोजनाओं को शामिल करने का अनुरोध भी किया गया। पहली, इंद्रपुरी जलाशय परियोजना, जो सोन नहर प्रणाली को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करेगी। बिहार और झारखंड के बीच जल बंटवारे को लेकर एम०ओ०यू० पर हस्ताक्षर होने के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। दूसरी, सोन-फल्गु रिवर लिंक परियोजना, जिसके तहत सोन नद के पानी को पाइपलाइन और नहरों के माध्यम से फल्गु नदी तक पहुंचाने की योजना है। इससे गयाजी और औरंगाबाद जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। साथ ही विश्वप्रसिद्ध फल्गु नदी में सालों भर जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। तीसरी, सारण जिले की बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी परियोजना (फेज-1), जिसकी अनुमानित लागत 1,350.95 करोड़ रुपये है। इसके तहत मुख्य जलनिकासी चैनलों का जीर्णोद्धार, नए रेगुलेटरों का निर्माण और अन्य संरचनात्मक कार्य किए जाने हैं। इससे सारण क्षेत्र में बाढ़ का प्रभाव कम होगा, कृषि भूमि की सुरक्षा होगी तथा प्रस्तावित सोनपुर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, एयरोसिटी और आसपास के शहरी क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने बैठक में गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (GFCC) के अध्यक्ष का मुख्यालय पटना में बनाए रखने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार गंगा बेसिन का सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्य है और आयोग की प्रभावी निगरानी एवं त्वरित निर्णय के लिए इसका पटना में रहना जरूरी है। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के नवीनीकरण और बिहार के हितों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार लंबे समय से गाद (सिल्ट) की समस्या और जल उपलब्धता की चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाने तथा

बिहार की सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

बैठक में नेपाल से जुड़ी लंबित परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना को शीघ्र आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने संयुक्त परियोजना कार्यालय (JPO) में बिहार के प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और डी०पी०आर० तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया। इन परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तर बिहार को बाढ़ से राहत, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और जलविद्युत उत्पादन के नए अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बिहार के विकास को निरंतर प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बिहार की सभी महत्वपूर्ण सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को शीघ्र गति मिलेगी, जिससे किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों और राज्य की अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ पहुंचेगा।

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