आरएसएम पब्लिक स्कूल के प्राचार्य पर गंभीर आरोपों की बौछार, जन सुराज ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग!

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रिपोर्ट :- संतोष चौहान!

सुपौल :- आरएसएम पब्लिक स्कूल, सुपौल के प्राचार्य रतीश कुमार पर कथित अनियमितताओं, वित्तीय गड़बड़ियों और अनैतिक गतिविधियों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने इन आरोपों को सार्वजनिक करते हुए जिला पदाधिकारी सह विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष को आवेदन देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
जन सुराज जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि विद्यालय के प्राचार्य द्वारा अपने पद का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए कई वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के विपरीत गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन कथित गतिविधियों के कारण विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है तथा शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्र-छात्राओं के बीच भय का माहौल बना हुआ है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
अनिल कुमार सिंह ने कहा कि विद्यालय के प्रबंधन में जिला पदाधिकारी अध्यक्ष और उप विकास आयुक्त उपाध्यक्ष हैं। इसके बावजूद विद्यालय में लगातार कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सरकारी अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित कर कराई जाए।
चार महीने पुराने परिवाद की जांच नहीं होने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनिल कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय में कथित अनियमितताओं और अनैतिक गतिविधियों को लेकर एक महिला द्वारा 5 मई 2026 को जिला पदाधिकारी को परिवाद दिया गया था। इसके बाद जिला गोपनीय शाखा के विशेष कार्य पदाधिकारी द्वारा पत्रांक 953-1/गो, दिनांक 11 मई 2026 के माध्यम से अनुमंडल पदाधिकारी, सुपौल एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान को मामले की जांच कर प्रतिवेदन जिला पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि करीब चार महीने बीत जाने के बाद भी मामले की जांच शुरू नहीं की गई। अनिल सिंह ने कहा कि शिकायत सही है या गलत, इसका फैसला निष्पक्ष जांच के बाद ही होना चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
छात्र के साथ अमर्यादित व्यवहार के आरोप का भी उल्लेख
जन सुराज जिलाध्यक्ष ने 17 अगस्त 2026 को चकला निर्मली निवासी आशुतोष कुमार द्वारा जिला पदाधिकारी को दिए गए एक परिवाद का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि परिवाद में एक छात्र के साथ कथित रूप से अमर्यादित भाषा के प्रयोग का आरोप लगाया गया है तथा विद्यालय के सचिव, प्राचार्य एवं संयोजिका के संबंध में उचित निर्णय लेने का अनुरोध किया गया है।
इसके अलावा 27 अगस्त 2026 को पत्रकार प्रियांशु आनंद द्वारा जिला पदाधिकारी को दिए गए आवेदन का भी उल्लेख किया गया। अनिल कुमार सिंह के अनुसार, आवेदन में पत्रकार द्वारा प्राचार्य पर खबर प्रकाशित किए जाने के बाद कथित रूप से झूठे मुकदमे में फंसाने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्राचार्य रतीश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। अनिल कुमार सिंह ने दावा किया कि प्राचार्य पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था और आवेदन की अंतिम तिथि 30 दिसंबर 2023 निर्धारित थी, जबकि साक्षात्कार 28 दिसंबर 2023 को ही करा लिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में केवल दो अभ्यर्थी शामिल हुए और लिखित परीक्षा नहीं ली गई। उनके अनुसार, रतीश कुमार की नियुक्ति 15 जनवरी 2024 को सह-प्राचार्य के पद पर हुई और 1 अप्रैल 2024 से वे प्राचार्य के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने नियुक्ति से जुड़े शैक्षणिक प्रमाण पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र एवं अन्य दस्तावेजों के सत्यापन की भी जांच कराने की मांग की।
शिक्षकों को हटाने और नियुक्तियों में अनियमितता का आरोप
अनिल कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि प्राचार्य की कार्यप्रणाली से विद्यालय के कई शिक्षक-शिक्षिकाओं में असंतोष और भय का माहौल है। उन्होंने कहा कि प्राचार्य के कथित गलत कार्यों का विरोध करने वाले शिक्षकों को विभिन्न कारणों से हटाया गया या उन्हें विद्यालय छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने कई पूर्व शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों का उल्लेख करते हुए उनके विद्यालय छोड़ने अथवा हटाए जाने की परिस्थितियों की जांच कराने की मांग की। साथ ही कोऑर्डिनेटर पद समेत विभिन्न नियुक्तियों की प्रक्रिया और वैधता पर भी सवाल उठाए गए।
छात्रावास और खरीदारी व्यवस्था की जांच की मांग
जन सुराज जिलाध्यक्ष ने विद्यालय एवं छात्रावास की खरीदारी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर वित्तीय आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रावास संचालन और विभिन्न सामग्रियों की खरीद में कथित रूप से अनियमितताएं की गईं तथा कुछ सामान अधिक कीमत पर खरीदे गए।
उन्होंने मांग की कि विद्यालय के बैंक खाते, कैशबुक, लेजर, वाउचर, खरीद संबंधी बिल, भुगतान अभिलेख और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच एवं ऑडिट कराई जाए। उनका दावा है कि निष्पक्ष वित्तीय जांच से विद्यालय की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
सीबीएसई मानकों और छात्र संख्या पर सवाल
अनिल कुमार सिंह ने विद्यालय में सीबीएसई मानकों के अनुपालन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विद्यालय में कक्षा एक से 12वीं तक बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं नामांकित हैं और वास्तविक नामांकन, कक्षाओं की क्षमता तथा निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय में कुछ गतिविधियों के कारण शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। साथ ही छात्राओं की उपस्थिति कम होने और विद्यालय परिसर में प्राचार्य कक्ष की व्यवस्था को लेकर भी जांच की मांग की गई।
जूता खरीद-बिक्री और अभिभावकों से अधिक राशि वसूली का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विद्यालय द्वारा छात्र-छात्राओं के जूते और अन्य सामान की खरीद-बिक्री को लेकर भी सवाल उठाए गए। अनिल कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि बाजार से सामान खरीदकर विद्यार्थियों और अभिभावकों से अधिक राशि वसूली गई। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 के खरीद बिलों की जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि खरीद मूल्य और विद्यार्थियों से ली गई राशि की तुलना की जानी चाहिए।
10 दिनों में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
जन सुराज पार्टी के जिलाध्यक्ष ने जिला पदाधिकारी से सरकारी अधिकारियों की विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच में नियुक्तियों, वित्तीय लेन-देन, खरीदारी, छात्रावास संचालन, शिक्षकों के सेवा अभिलेख और सीबीएसई मानकों समेत सभी आरोपों को शामिल किया जाना चाहिए।
अनिल कुमार सिंह ने कहा कि विद्यालय से हजारों छात्र-छात्राओं और अभिभावकों का भविष्य जुड़ा हुआ है, इसलिए मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर आरोपों की जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो जन सुराज पार्टी आंदोलन करने को बाध्य होगी।
फिलहाल, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में विद्यालय प्रबंधन और प्राचार्य का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

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