रिपोर्ट – निभाष मोदी!
भागलपुर: जिले के सबौर प्रखंड के फरका पंचायत का इंग्लिश गांव इन दिनों गंगा के भीषण कटाव की चपेट में है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ कटाव ने अब रफ्तार पकड़ ली है। हालात इतने भयावह हो गए हैं कि देखते ही देखते कई घर गंगा की धारा में समा चुके हैं। रविवार सुबह इतवारी साह का दो मंजिला पक्का मकान भी देखते ही देखते गंगा में विलीन हो गया। मकान के नदी में समाते ही इलाके में चीख-पुकार मच गई।
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही इंग्लिश गांव के आसपास कटाव भी तेज हो गया है। गंगा की तेज धारा लगातार गांव की ओर बढ़ रही है। कटाव के कारण कई घरों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। रंजीत तांती, छट्टू तांती, दीपक तांती और धनेश्वर तांती समेत कई ग्रामीणों के घर कटाव के मुहाने पर पहुंच गए हैं।
*घर बचाने के बजाय सामान बचाने की जद्दोजहद*
कटाव की भयावह स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। जिन घरों के पास कटाव तेजी से बढ़ रहा है, वहां रहने वाले लोग अब अपने आशियाने को खाली करने में जुट गए हैं। ग्रामीण घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। किसी को अपने घर के गिरने की चिंता है तो किसी को परिवार की सुरक्षा की।
एक महिला का घर भी कटाव की चपेट में आकर गंगा में समा गया। अपना घर नदी में विलीन होने के बाद महिला रोते हुए अपनी पीड़ा बताती नजर आई। महिला ने कहा कि जिस घर में परिवार के साथ जीवन बिताया, वह देखते ही देखते गंगा में समा गया। अब उनके सामने रहने और परिवार को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
*ग्रामीणों को सता रहा पूरा गांव गंगा में समाने का डर*
ग्रामीणों का कहना है कि अगर कटाव इसी रफ्तार से जारी रहा तो बहुत कम समय में गांव का बड़ा हिस्सा गंगा की धारा में समा सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि लगातार कटाव के बावजूद अब तक कटावरोधी कार्य शुरू नहीं होने से उनकी चिंता बढ़ती जा रही है।गंगा की तेज धार के सामने ग्रामीण खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं। लोग प्रशासन और सरकार से तत्काल कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग कर रहे हैं, ताकि बचे हुए घरों और गांव को सुरक्षित किया जा सके।इंग्लिश गांव में फिलहाल हर पल खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों की नजर गंगा की धारा पर टिकी है और उन्हें डर है कि अगला घर किसका होगा, यह कहना मुश्किल है। एक तरफ बढ़ता गंगा का जलस्तर और दूसरी तरफ तेज कटाव ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। अब लोगों को इंतजार है कि प्रशासन कब सक्रिय होता है और गांव को गंगा के कटाव से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।



