रिपोर्ट – अमित कुमार!
जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने आज पटना स्थित जदयू कार्यालय में प्रेसवार्ता कर शराबबंदी कानून पर सरकार का रुख बिल्कुल साफ कर दिया।
नीरज कुमार कहा कि बिहार में लागू शराबबंदी की समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं उठता और इस कानून को किसी भी परिस्थिति में खत्म नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार शराबबंदी केवल एक सरकारी फैसला नहीं है बल्कि यह बिहार की जनता का संकल्प है जिसे समाज के हर वर्ग का समर्थन प्राप्त है।
नीरज कुमार ने कहा कि पिछले वर्षों में शराबबंदी के कारण राज्य के सामाजिक और आर्थिक मानकों में ठोस बदलाव देखने को मिले हैं। उनके मुताबिक मानव विकास सूचकांक से जुड़े कई पैमानों पर बिहार में सुधार हुआ है। सबसे अधिक सकारात्मक असर ग्रामीण महिलाओं के जीवन पर पड़ा है क्योंकि शराब पर खर्च होने वाला पैसा अब परिवार की शिक्षा स्वास्थ्य और पोषण पर लग रहा है। घरेलू हिंसा और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आई है जिससे समाज में शांति का माहौल बना है।
उन्होंने हाल ही में सामने आई एनसीएईआर की रिपोर्ट और कुछ राजनीतिक सहयोगियों द्वारा की गई समीक्षा की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। जीतन राम मांझी द्वारा उठाए गए सवाल और गुजरात मॉडल को बिहार में लागू करने की वकालत पर उन्होंने कहा कि हर राज्य की अपनी सामाजिक परिस्थिति होती है और बिहार ने शराबबंदी को जन आंदोलन के रूप में अपनाया है इसलिए इसकी तुलना अन्य राज्यों से नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शराब कंपनियां नहीं चाहतीं कि बिहार में शराबबंदी सफल हो क्योंकि इससे उनके व्यापार को सीधा नुकसान हो रहा है।
नीरज कुमार ने दोहराया कि सरकार अवैध शराब के खिलाफ अभियान और भी तेज करेगी साथ ही जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर देगी ताकि युवा नशे से दूर रहें। उनके शब्दों में शराबबंदी बिहार के भविष्य की नींव है और इस संकल्प से पीछे हटने का प्रश्न ही नहीं उठता।




